मझगईं। दुधवा टाइगर रिजर्व से सटे मझगईं रेंज के ग्रामीण इलाकों में पिछले एक महीने से बना बाघों का खौफ अब धीरे-धीरे थमने लगा है। गुनाखर टांडा, किशुनपुर टांडा और कोलवा फार्म में हाथियों की मदद से शुरू की गई सघन कॉम्बिंग के चलते पिछले दो दिनों से इलाके में बाघों की कोई नई हलचल दर्ज नहीं की गई है। हालांकि ग्रामीणों में दहशत अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
रविवार को गुनाखर टांडा में उस समय हड़कंप मच गया था, जब गांव निवासी प्रीतम सिंह जंगल की ओर से अपने मवेशियों को लेकर लौट रहे थे। शाम करीब 4:30 बजे गांव के उत्तर में स्थित डॉ. दिनेश सिंह के खेत के पास गन्ने के झुरमुट में उन्हें एक साथ तीन बाघ दिखाई दिए। प्रीतम ने किसी तरह भागकर जान बचाई और गांव पहुंचकर शोर मचाया। देखते ही देखते पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई और ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी।
इससे पहले भी बाघ करीब छह मवेशियों को अपना शिकार बना चुके थे।
सूचना मिलते ही वन विभाग तुरंत हरकत में आया। बाघों को आबादी से दूर खदेड़ने और उनकी सटीक लोकेशन ट्रेस करने के लिए किशनपुर बेस कैंप से हथिनी डायना और सलूकापुर से हथिनी पाखरी को बुलाया गया। हाथियों पर सवार होकर वन कर्मियों ने गन्ने के खेतों और सीमावर्ती जंगलों में व्यापक गश्त शुरू की।
बाघों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में 16 ट्रैप कैमरे लगाए गए हैं। साथ ही वन विभाग की टीम लाउडस्पीकर के जरिये गांव-गांव मुनादी कराकर ग्रामीणों को सतर्क कर रही है और जंगल की ओर न जाने की हिदायत दे रही है।
रेंजर अंकित सिंह ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से दो हथिनियों को मौके पर बुलाया गया है, जिनकी मदद से स्टाफ कॉम्बिंग कर रहा है। ग्रामीणों को स्पीकर के माध्यम से जंगल की ओर न जाने के साथ सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। वन विभाग की टीम लगातार इलाके पर नजर बनाए हुए है। दो दिनों से इलाके में बाघों का नया मूवमेंट रिकॉर्ड नहीं हुआ है। संवाद