पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में एक दिन में बाघिन व एक बाघ की हुई मौत से पार्क प्रशासन को झटका लगा है। जानकार इसके पीछे गश्त और मॉनिटरिंग की कमी बात रहे हैं।
जंगल से सटे खेतों में गन्ना की फसल को भी कारण माना जा रहा है। बाघ गन्न के खेत को अपना वासस्थल बना चुके हैं। इसका कारण उन्हें आसानी से शिकार उपलब्ध हो जाना है।
दुधवा नेशनल पार्क के विशाल जंगल में बाघों की संख्या में इजाफा हुआ है और जंगल की तरह वह गन्ने के खेत को भी समझते हैं। जंगल के सीमावर्ती इलाकों में गन्ने की फसल के आसपास नीलगाय, चीतल, सांभर और सूअर जैसे शिकार आसानी से मिल जाते हैं। जानकारों का कहना है कि जब बाघिन शावक को जन्म देती है तब उनके लिए यह स्थान काफी मुफीद माना जाता है।
हालांकि, दखलअंदाजी बर्दाश्त न करने के कारण खतरे को भांपते बाघिन लोगों पर हमला करती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, बाघ नरकुल में रहता है और गन्ने के खेतों को भी नरकुल ही समझ लेता है। जिसके कारण यह यहां खासकर गन्नों में घुसकर बैठता है।