बांकेगंज। मैलानी और गोला रेंज की सीमा पर स्थित बरौंछा नाला क्षेत्र में सक्रिय बाघ की रविवार को ड्रोन से तलाश की गई, लेकिन वनकर्मियों को सफलता नहीं मिली।
तीन माह से भी अधिक समय से जंगल से बाहर रहने के कारण बाघ लगातार हिंसक होता जा रहा है। हालांकि, बीती रात वह न तो आबादी के पास पहुंचा और न ही किसी मवेशी का शिकार किया है। इसके बावजूद ग्रामीणों में दहशत बरकरार है।
उधर, दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ संजय बिश्वाल ने रविवार शाम बरौंछा नाला क्षेत्र में पहुंचकर बाघ को बेहोश कर पकड़ने के लिए चलाए जा रहे अभियान का जायजा लिया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव अनुराधा बेमुरी के निर्देश पर उसे बेहोश करने के लिए गठित पशु चिकित्सकों की टीम में शामिल डॉ. दयाशंकर और दीपक वर्मा से वार्ता के बाद वन कर्मियों की टीम को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उसे पकड़ने के लिए किए जा रहे उपायों को बारीकी से देखा।
संभावित स्थानों पर लगाई गई खाबड़, कॉम्बिंग, पिंजरा और कैमरों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बाघ को पकड़ने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सटीक लोकेशन मिलते ही उसे बेहोश कर पकड़ा जाएगा।
प्रभावित क्षेत्र में गठित वन कर्मियों की टीम को बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। रेंजर गोला संजीव तिवारी, फॉरेस्टर अजीत, अफजल समेत ग्रामीण मौजूद रहे।
बाघ मित्रों ने ग्रामीणों को किया जागरूक
बांकेगंज। दक्षिण खीरी वन प्रभाग में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से तैनात बाघ मित्रों ने बाघ के हमलों से बचाव के प्रति ढ़ाका गांव में रविवार को गोष्ठी की। इसमें लोगों को जागरूक किया गया। गोष्ठी में बाघ मित्र अनिल चौहान व लोकराम ने लोगों को बाघों के स्वभाव के बारे में बताया। कहा कि हमलों से बचाव के लिए अंधेरा होने पर टॉर्च की रोशनी में घर से बाहर निकलना चाहिए। गांवों में मकानों के आसपास खड़ी घास-फूंस की साफ-सफाई करने से हिंसक वन्यजीवों के छिपने का खतरा नहीं रहता है। आबादी के पास बाघ दिखने पर इसकी सूचना वन विभाग व क्षेत्र के बाघ मित्र को दें। संवाद
बरौंछा नाला क्षेत्र का जायजा लेते डीएफओ संजय बिश्वाल। संवाद।