जंगल में सड़क किनारे बाघ को देख पुलिस के उड़े होश
मोहम्मदी। गांव साहबगंज के निकट घने जंगल में सड़क किनारे पेड़ के नीचे बाघ बैठा देखकर पुलिस के होश उड़ गए। पुलिस ने गांव में जाकर लोगों को सतर्क किया।
रेहरिया चौकी इंचार्ज पाठक ने बताया कि रात गश्त के दौरान वह साहबगंज गांव की ओर जा रहे थे। पुलिस चौकी से करीब चार किलोमीटर दूर जंगल में एक बाघ पेड़ के नीचे बैठा दिखाई पड़ा। बाघ देख पुलिस वालों में हड़कंप मच गया। पुलिस ने तुरंत जंगल के निकट झोपड़ी में रहने वाले ग्रामीणों को सचेत किया। संवाद
नहर में बने मिले पगचिह्न
ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के स्याहपारा क्षेत्र में सोमवार शाम एक बाघ बड़ी नहर में पानी पीने आया, जिसे देख ग्रामीणों के होश उड़ गए।
मौके पर स्याहपारा, सहुआपुर, ऊंचागांव के तमाम ग्रामीण एकत्र हो गए। इस दौरान यातायात काफी देर तक ठप रहा। भीड़ के शोर मचाने और आग जलाने पर बाघ नहर से निकलकर गन्ने के खेत में घुस गया। ग्रामीणों की सूचना पर जगदीश वर्मा, अनिल शर्मा आदि वनकर्मी मौके पर पहुंच गए। जिन्होंने नहर में बाघ के पगचिह्न मिलने की पुष्टि कर बताया कि यह वही बाघ है जो धिरावां के पास मोहम्मदी रोड पर खड़ा देखा गया था।
मुख्य वनसंरक्षक ने जाना बाघ प्रभावित क्षेत्रों का हाल
ममरी। डीएफओ समीर कुमार के साथ मंगलवार को महेशपुर रेंज पहुंचे प्रमुख वनसरंक्षक वन्यजीव सुनील पांडे और मुख्य वनसंरक्षक लखनऊ मंडल आर के सिंह ने रेंजर मोबीन आरिफ संग बाघ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण किया। साथ ही बाघों को ट्रंकुलाइज करने के लिए अयोध्यापुर, परेली, रोशननगर आदि स्थानों पर वनकर्मियों द्वारा लगाए गए पिंजरों, कैमरों का भी निरीक्षण किया।
इस दौरान अधिकारियों ने बुधेलीनानकार गांव जाकर 30 दिसंबर को बाघ के हमले में मरे 65 वर्षीय लालबिहारी और गंभीर रूप से घायल 42 वर्षीय रमेश पंडित से मिलकर घटनास्थल का जायजा लिया। साथ ही सुंदरपुर गांव पहुंचकर प्रधान प्रतिनिधि रामकुमार वर्मा आदि से भी जानकारी ली और दुधवा पार्क से आई गंगाकली हथिनी का भी निरीक्षण किया। इसके अलावा महावत अनीश खां को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए। प्रमुख वनसरंक्षक ने कहा कि यदि बाघों का आतंक इसी तरह रहा तो लोगों को गांवों में रहना और खेती आदि करना मुश्किल हो जाएगा। अधिकारियों ने रेंजर आदि वनकर्मियों को भी लोगों को बाघ से बचाव कराने के लिए जरूरी दिखा निर्देश दिए और ठोस कदम उठाने की बात कही।