लखीमपुर खीरी के गोला रेंज की पश्चिम बीट जंगल से सटे इमलिया गांव के ग्रामीणों को सोमवार सुबह सात बजे गन्ने के खेत में बाघ का शव पड़ा दिखाई पड़ा। लोगों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया।
लखीमपुर खीरी के गोला रेंज के इमलिया गांव के पास सोमवार सुबह ग्रामीणों को गन्ने के खेत में बाघ का शव पड़ा दिखाई दिया। लोगों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने शव को कब्जे में लिया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) के निर्देश पर वन संरक्षक (लुप्तप्राय) संजय बिश्वाल ने रेंजर के साथ मौके का मुआयना किया। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण स्पष्ट न होने के चलते बिसरा सुरक्षित किया गया है।
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बांकेगंज-गोला मार्ग के पास इमलिया गांव निवासी किसान सोमवार सुबह सात बजे फसलों की देखभाल करने गए थे। इस दौरान रजबहा के पास रावेंद्र के गन्ने के खेत में एक बाघ का शव पड़ा दिखाई दिया। यह देख ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। मौके पर रेंजर संजीव तिवारी के साथ पहुंची वन विभाग की टीम उच्चाधिकारियों को सूचना के बाद शव रेंज परिसर ले गई। गांव पहुंचे डीएफओ साउथ तापस मिहिर ने स्थिति देखी। बताया कि बाघ के सभी अंग सुरक्षित मिले हैं। शरीर पर किसी तरह चोट के निशान नहीं पाए गए।। नर बाघ की उम्र आठ साल के करीब है।
चिकित्सकों के पैनल ने किया पोस्टमॉर्टम
एनटीसीए ( राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ) व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ( वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर ) की देखरेख में तीन पशु चिकित्सकों के पैनल से शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। इस पैनल में दुधवा के पशु चिकित्सक डॉ. दयाशंकर, डॉ. दीपक वर्मा और गोला के पशु चिकित्सालय के डिप्टी सीवीओ डॉ. अमित कात्यान शामिल रहे।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ तापस मिहिर ने बताया कि बाघ के शव का तीन पशु चिकित्सकों के पैनल से पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। बिसरा सुरक्षित किया गया है, जिसे जांच के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजा जाएगा।