लखीमपुर खीरी। पुरानी रंजिश को लेकर ग्रामीण पर जानलेवा हमला करने के 20 साल पुराने मामले में एडीजे अभिषेक श्रीवास्तव ने शुक्रवार को फैसला सुनाया है। जीवित बचे तीनों दोषियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है। एक की पहले ही मौत हो चुकी है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी ने बताया कि कोतवाली क्षेत्र के गांव पकरिया निवासी मतीन गोलहापुर निवासी अपने बहनोई निजामुद्दीन के घर आया हुआ था। 21 अगस्त 2004 की शाम सात बजे वह अपने बहनोई निजामुद्दीन और उसके साथी तौफीक तथा इदरीश के साथ साइकिल से घर जा रहा था। छाउछ से बेहजम की ओर थोड़ी ही दूरी पर सुखदेव की मिठाई की दुकान के पास पहुंचा था, कि गोलहापुर के शरफुद्दीन, लाला और अशफाक तथा मौलवीगंज के मुन्ना ने निजामुद्दीन पर हमलाकर दिया। मतीन ने बीच बचाव की कोशिश तो हमलावरों ने फायरिंग और बांका से प्रहार करते हुए उसे चोटिल कर दिया।
पुलिस ने सभी हमलावरों के खिलाफ जानलेवा हमले की धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान ही शमशुद्दीन की मौत हो गई थी। शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए एडीजे अभिषेक श्रीवास्तव ने तीनों हमलावरों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। संवाद