लखीमपुर खीरी। जिले में डग्गामार वाहनों की भरमार है। चेकिंग के बाद भी डग्गामार पर रोक नहीं लग पा रही। जनपद के धौरहरा, मैगलगंज, गोला, निघासन, नकहा, पलिया, गोला आदि मार्गों पर सुबह से देर रात तक डग्गामार वाहन सवारियों को लाने-ले जाने का काम करते हैं। डग्गामार वाहनों से यात्रियों की जान खतरे में रहती है, बावजूद इसके जिम्मेदार ध्यान नहीं देते।
आठ सीटर वाहन में चालक 12 से 15 सवारियां भरकर फर्राटा भरते हैं। वहीं 35 सीटर निजी बसों में 50 से 60 सवारियां बिठाई जा रहीं हैं। प्राइवेट बस यूनियन के पदाधिकारी परिवहन निगम के अफसरों के साथ ही जिला प्रशासन से शिकायत कर चुके हैं, बावजूद इसके कोई रोक नहीं।
सड़क हादसों को रोकने के लिए भले ही शासन गंभीर है, लेकिन जिलास्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई देती। पीलीभीत-बस्ती नेशनल हाईवे पर मुख्यालय से सिसैया तक पुलिस विभाग की आठ चेक पोस्ट हैं। परिवहन व पुलिस सुबह-शाम वाहनों की जांच करती दिखती है, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दो पहिया वाहन या फिर ई-रिक्शा तक ही सीमित रहती है।
आलम यह है कि मुख्यालय से सिसैया तक बड़ी संख्या में डग्गामार मानक से अधिक सवारियां लेकर दौड़ते हैं। बड़ी संख्या में मैजिक, निजी बसें, ईंट भरी ट्रॉलियां, ट्रक पर कोई खास कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। गोला, फूलबेहड़, नकहा मार्ग पर भी डग्गामार की भरमार है। सुबह छह बजे से डग्गामार दौड़ने लगते हैं, जो देर शाम तक बेरोकटोक चलते हैं। हाईवे पर ई-रिक्शा भी नियमों की अनदेखी कर दौड़ रहे हैं।
माल वाहन से भी ढोई जाती हैं सवारियां
जिले में डग्गामार वाहन की भरमार तो है ही साथ ही माल वाहनों से भी सवारियों को लाने ले जाने का काम किया जाता है। माल वाहन से सवारियों को ले जाने का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वाहन का पीछे का हिस्सा सवारियों से भरा था। किसी कार चालक ने उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया था। यह वीडियो भीरा मार्ग का बताया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद अफसरों ने उस वाहन की तलाश शुरू कर दी है।
फील्ड में रहकर वाहनों की चेकिंग करते हैं। रोजाना चार से पांच या इससे भी अधिक वाहनों का चालान व सीज करने की कार्रवाई की जाती है। डग्गामार वाहनों पर काफी अकुंश लगा है। -डॉ. कौशलेंद्र, प्रवर्तन अधिकारी
डग्गामार वाहनों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। काफी हद तक रोक भी लगी है। डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान अभी जारी रहेगा। सभी स्कूलों से वाहनों के फिटनेस के प्रमाणपत्र लिए जा रहे हैं। -अखिलेश द्विवेदी, एआरटीओ