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‘तब लाठियां खाईं थीं, अब है श्री रामलला के दर्शन की इच्छा’

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गोला के गोकर्ण तीर्थ पर जलते दीये। - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। बुधवार को अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन में शामिल न हो पाने का बहुत से लोगों खासकर उन लोगों को विशेष मलाल है, जिन्होंने अयोध्या जाने के लिए पुलिस प्रताड़ना सही, लाठियां खाईं और कई बार गिरफ्तारी दी, लेकिन फिर भी वहां पहुंचे। मंदिर निर्माण के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर कारसेवकों का हुजूम तैयार किया। अब इन लोगों की इच्छा रामलला का मंदिर देखने की है।
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शहर निवासी राजीव तिवारी बताते हैं कि आरएसएस के एक नेता के संपर्क में आने के बाद कारसेवा से जुड़ गया। लोगों को इससे जोड़ने के लिए मुहिम शुरू की। 23 नवंबर 1989 को पहला जत्था अयोध्या के लिए रवाना हुआ। जेल भरो आंदोलन के दौरान 250 लोगों के साथ सामूहिक गिरफ्तारी दी। इसके बाद आठ सितंबर 1990 को कारसेवा में गए। कुल मिलाकर 30-35 बार आयोध्या जाना हुआ। आज का दिन उनके लिए ही नही बल्कि पूरे हिंदू समाज और देश के लिए सौभाग्यशाली है। कहा-प्रधानमंत्री मोदी के नींव पूजन करते ही जीवन सार्थक हो गया।
आचार्य संजय मिश्रा बताते हैं 30 नवंबर 1990 और छह दिसंबर 1992 को अयोध्या में रहे। कहा-आज मंदिर निर्माण का शिलान्यास होने से अशोक सिंघल की आत्मा को शांति मिलेगी।
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डॉ. दयानंद शुक्ला बताते हैं कि सालों से इसी दिन का इंतजार कर रहा था। भगवान राम ने हमारी मनोकामना पूरी कर दी। अब बस एक ही तमन्ना है कि रामलला के मंदिर के दर्शन करूं।
शिवकांत मिश्रा कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा के दौरान उठाई गई सारी मुसीबत आज सार्थक हो गई। पूरे हिंदू समाज की बस एक ही इच्छा थी कि रामलला को अपना घर मिले, आज वह पूरी हो गई। अब रामलला का मंदिर देखने में इच्छा है।
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श्रीराम मंदिर के लिए जेल गए राम भक्तों में हर्ष
गोला गोकर्णनाथ। ‘सौगंध राम की खाते हैं मंदिर वहीं बनाएंगे और राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।’ ‘बच्चा बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का’ आदि नारे लगाकर जेल काटने वाले कार सेवकों में आज खुशी का माहौल है। वह कहते हैं कि श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन से उन्हें जो खुशी हुई है उसका वर्णन नहीं कर सकते।
मूलरूप से गांव कैमहरा और वर्तमान में नगर के मोहल्ला नीची भूड़ निवासी शिक्षक हरीशचंद बाजपेयी ने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनके साथ अनूप बाजपेयी, जड़ौरा के सूबेदार मिश्र सहित तमाम रामभक्त अयोध्या जा रहे थे कि उन्हें गिरफ्तार कर संपूर्णानगर में बनाई गई अस्थायी जेल में बंद कर दिया गया था। जहां उन लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था।
भाजपा के पूर्व नगराध्यक्ष रामकृष्ण गुप्ता का कहना है कि अब जाकर भव्य एवं दिव्य श्रीराम मंदिर का शिलान्यास देखने का अवसर श्रीराम की कृपा से प्राप्त हुआ है। वह स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। बताया कि संपूर्णानगर अस्थायी जेल में रहने, श्री रामजन्म भूमि अयोध्या में कार सेवा में भाग लेने का सौभाग्य और परम पूज्य महंत अवैद्यनाथ जी एवं अशोक सिंघल जी के पावन सानिध्य प्राप्त हुआ था।
ममरी। परेली के सुरेशचंद गुप्ता बताते हैं कि वह वर्ष 1992 में श्रीराम मंदिर आंदोलन में स्वर्गीय देवेंद्र कुमार वर्मा के साथ संपूर्णानगर की अस्थायी जेल में 17 दिन बंद रहे थे। वह 1967 में जनसंघ पार्टी के विधायक रहे राज राजेश्वर शुक्ला के सानिध्य में रहे, तभी से वह श्री राम मंदिर निर्माण की लगन लगाए थे, जिनका सपना आज पूरा हुआ है, जिससे उन्हें अपार खुशी हुई है।
जड़ौरा गांव निवासी डॉ सतीशचंद्र मिश्र ने बताया कि उनके साथ में उमाशंकर मिश्र ललुआ सहित तमाम कार सेवकों के जत्थे को पुलिस ने गिरफ्तार कर संपूर्णानगर की अस्थायी जेल में बंद कर दिया था। जेल में बंद होने के दौरान भी उन लोगों का हौसला बुलंद रहा और वह लोग जय श्रीराम का जयघोष निरंतर करते रहे।
चिकित्सक डॉ आदित्य पुरवार का कहना है कि वह वर्ष 1990 के श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में आयोध्या जाना चाहते थे, किंतु पुलिस ने उन्हें पहले ही गिरफ्तार कर लिया और जिले की संपूर्णानगर में बनाए गए अस्थायी कारागार में बंद कर दिया। जहां वह 16 दिन जेल में रहे और काफी परेशानियां झेलीं। श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन से अब मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिसकी उन्हें खुशी है।
भाजपा के तत्कालीन नगराध्यक्ष महेशचंद गुप्त बताते हैं कि वह अपनी कमेटी और काफी संख्या में कार्यकर्ताओं को साथ लेकर अयोध्या जाने का कार्यक्रम बना चुके थे। किंतु इससे पूर्व ही रात में 12 बजे पुलिस उन्हें और उनके साथी पतिराखनलाल वर्मा, वीर सिंह चौहान और डॉ अम्ब्रीश को कोतवाली ले गई, जहां से उन्हें दूसरे दिन हरदोई में बनी अस्थायी जेल में ले जाकर बंद कर दिया गया। बताया कि जेल में उनके साथ लखीमपुर के डॉ जयशंकर बाजपेयी और पूर्व विधायक रामचरन शाह भी थे। वह लोग नित्य प्रात:काल मंदिर निर्माण की शपथ सभी को दिलाते थे। अब उन्हें गर्व महसूस हो रहा है कि जो शपथ वह लेते थे वह अब भाजपा शासनकाल में पूरी हुई है।
भाजपा कार्यकर्ता ईश्वरदीन वर्मा ने बताया कि वर्ष 1990 में वह बजरंग दल के विभाग संयोजक थे। उनके पास लखीमपुर, सीतापुर और हरदोई जिले का जिम्मा था। श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति के लिए वर्ष 1990 में हुए आंदोलन में उन्होंने संगठित तौर पर अयोध्या जाने की योजना बनाई किंतु जाने से चार दिन पूर्व रात्रि में ही पुलिस ने उन्हें कंजा गांव से गिरफ्तार कर लिया और संम्पूर्णानगर में बनी अस्थायी जेल में निरुद्ध कर दिया। जहां से वह 20 दिन बाद रिहा हुए, आज मंदिर का शिलान्यास होने पर काफी खुश हैं।
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