जनपद की सहकारी समितियां फिर यूरिया खाद से ड्राई हो गई हैैं, क्योंकि जनवरी में लक्ष्य 11,689 मीट्रिक टन के सापेक्ष एक भी रैक यूरिया की नहीं मिली है। जबकि दिसंबर में भी यूरिया का संकट बना रहा, क्योंकि लक्ष्य के मुकाबले 50 फीसदी भी यूरिया नहीं मिली थी। इससे रबी सीजन में गेहूं की दूसरी टाप ड्रेसिंग के लिए किसानों में यूरिया के लिए त्राहि-त्राहि मची है। इफको यूरिया की रैक न लग पाने के पीछे रेलवे कंजेशन की वजह बताई जा रही है। वहीं प्राइवेट दुकानों पर ओवररेटिंग की समस्या किसानों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई हैै।
रबी सीजन में यूरिया वितरण का लक्ष्य 46755 एमटी है, जिसे 193 सहकारी केंद्रों के माध्यम से किसानों को बिक्री किया जाना हैै। माहवार क्रमिक लक्ष्य के मुताबिक जनवरी 2015 तक 39,000 एमटी यूरिया की जरूरत पड़ेगी। इसके सापेक्ष दिसंबर 2014 तक जनपद को 15,700 मीट्रिक टन यूरिया मिल सकी है। जबकि क्रमिक लक्ष्य के मुताबिक जनवरी में 11,689 मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति होना है। नए साल में भी किसानों के हिस्से में नाउम्मीदी ही हाथ लगी है। हालांकि कृषि अधिकारियों से लेकर डीएम तक शासन को यूरिया की किल्लत से अवगत कराते हुए पर्याप्त यूरिया की मांग कर चुके हैं। इसके बावजूद जनपद में यूरिया खाद का संकट बना हुआ है, क्योंकि ज्यादातर किसान सहकारी समितियों पर खाद के लिए निर्भर हैं।
महंगी यूरिया खरीदने के
लिए विवश हैं किसान
मूड़ा सवारान। रबी की फसलों के लिए किसानों को यूरिया खाद की बहुत आवश्यकता है। यूरिया के लिए किसान समितियों के चक्कर लगा रहे हैं। समितियों पर यूरिया खाद की कम उपलब्धता का लाभ उठाकर निजी खाद विक्रेता तय मूल्य से अधिक मूल्य पर यूरिया की बिक्री कर रहे हैं। इसके चलते मजबूरन किसानों को महंगे दाम पर यूरिया खरीदनी पड़ रही है।
सहकारी गन्ना समितियां कृषकों को ऋण पर यूरिया उपलब्ध कराती हैं लेकिन इन दिनों क्षेत्र की समितियों पर यूरिया नदारद है। सरकारी मूल्य पर बिकने वाली यूरिया इस समय 430 से 500 रुपये तक बेची जा रही है। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी फुटकर विक्रेता सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। उधर फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि थोक विक्रेता लोगों से बोरी पर अंकित मूल्य से 50 रुपये अधिक वसूल करता है तो वह किस तरह अंकित मूल्य पर बेच पाएंगे। इसके अलावा क्षेत्र में सैकड़ों उर्वरक की दुकानें खुली हैं। इन दुकानों पर भी सभी तरह के कीटनाशक तथा उर्वरकों की बिक्री खुलेआम मनमाने रेट पर होती है। किसानों ने निर्धारित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध कराने की मांग की है।
फैक्ट फाइल
जनपद में कुल खाद सहकारी केंद्र 193
पैक्स समितियां 132
पीसीएफ के केंद्र 12
क्रय विक्रय 04
सहकारी संघ 04
जूट संघ 02
केंद्रीय उपभोक्ता भंडार 17
इफको 01
जिला सहकारी संघ 03
यूपीएसएस 05
सहायक निबंधक (सहकारिता) राजेश कुमार सिंह ने बताया कि आखिरी रैक 31 दिसंबर को लगी थी, जिसके बाद से जनपद को यूरिया नहीं मिल पाई है। इफको के अधिकारियों ने रेलवे कंजेशन के चलते रैक न लगा पाने की वजह बताई है। जल्द से जल्द यूरिया आपूर्ति के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।