मझगईं में पिंजड़े में कैद बाघ। संवाद
पलियाकलां/मझगईं। मझगईं वन रेंज के तहत आतंक का पर्याय बने बाघ को पकड़ने के लिए कई दिनों से वन विभाग मशक्कत कर रहा था। बुधवार को वह बकरी खाने के चक्कर में कैद हो गया। देर शाम तक बाघ को जंगल में छोड़े जाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। ऐसे में बाघ मझगईं रेंज में ही दहाड़ता रहा।
बीती 28 अक्तूबर को चौखड़ा फार्म में मझगईं निवासी 25 वर्षीय बाबूराम को बाघ ने मार डाला था। इसके बाद करीब एक दर्जन छुट्टा गोवंशीय पशुओं को भी बाघ मार चुका था। बुधवार की सुबह पांच बजे पिंजड़े में बाघ आखिरकार कैद हो गया। उसको मझगईं रेंज में रखा गया था। वन विभाग के सूत्रों की मानें तो बाघ बृहस्पतिवार की शाम तक मझगईं रेंज में है। उसकी देखभाल के लिए लोगों को लगाया गया है। रेंजर अंकित सिंह ने बताया कि बाघ के भोजन के लिए पांच किलो मुर्गे का मीट दिया गया था।
बफर जोन के डीएफओ सौरीष सहाय ने बताया कि बाघ को मझगईं रेंज में रखा गया है। उसे जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। हल्द्वानी से कुछ विशेषज्ञ आए थे, बाकी दुधवा के डाॅ. दयाशंकर व उनकी टीम के जरिए बाघ का परीक्षण भी कराया गया है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के बाद ही बाघ को आगे कहीं छोड़ने की कार्रवाई की जाएगी।