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गन्ने की मिठास के बदले  किसानों को मिल रही घुटन

Fri, 17 Feb 2017 11:17 PM IST
अमित गुप्ता लखीमपुर खीरी। 
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चीनी - फोटो : self
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बजाज की तीनों मिलों ने सबसे ज्यादा दबाया किसानों का हक
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गोला, पलिया और खंभारखेड़ा पर पांच अरब से अधिक बकाया
चीनी का कटोरा कहे जाने वाले जिले के किसानों को मिठास की कीमत घुटन के रूप में मिल रही है। बजाज ग्रुप की तीन मिलें गोला, पलिया, खंभारखेड़ा किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान करने के मामले में सबसे पिछड़ी साबित हो रहीं हैं, जो गन्ना एक्ट के नियमों की खुले तौर पर धज्जियां उड़ा रही हैं। किसानों के हालात इतने खराब हो चुके हैं कि दिसंबर 2016 से गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया गया है। छह मिलों पर कुल बकाया गन्ना मूल्य छह अरब 55 करोड़ 28 लाख 48 हजार में से बजाज की तीन मिलों ने ही पांच अरब 33 करोड़ 90 लाख चार हजार रुपये दबा रखे हैं।
समय से किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान का मुद्दा विधानसभा चुनाव में भले ही छाया रहा, लेकिन अभी किसानों को राहत मिलती नहीं दिख रही है। पिछले तीन सालों से चीनी मिलें अड़ियल रवैया अख्तियार किए हैं, जिसके आगे शासन-प्रशासन के अफसर भी बौने साबित हो रहे हैं। जिसका असर यह है कि गोला, पलिया, खंभारखेड़ा मिलों की चीनी को कस्टडी में लिए जाने के बावजूद किसानों की समस्या हल नहीं हुई है। उल्टे किसानों को भुगतान के बदले चीनी देने का दांव मिल मालिकों ने खेला है, जिससे किसान परेशान हैं। 
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गोला मिल ने आठ दिसंबर 2016 तक खरीदे गन्ने का भुगतान किया है, जिससे इस पर किसानों का एक अरब 89 करोड़ आठ लाख 87 हजार रुपये बकाया है। पलिया मिल ने 18 नवंबर 2016 तक का भुगतान किया है, जिससे इस पर एक अरब 91 करोड़ 25 लाख 95 हजार रुपये बकाया है। इसी तरह खंभारखेड़ा मिल ने एक दिसंबर 2016 तक खरीदे गन्ने का भुगतान किया है, लिहाजा इस पर भी एक अरब 53 करोड़ 55 लाख 22 हजार रुपये बकाया है। इसी तरह ऐरा मिल ने 22 दिसंबर 2016 के बाद से भुगतान नहीं किया है, जिससे इस पर 97 करोड़ 24 लाख 25 हजार रुपये बकाया है। सहकारी क्षेत्र की बेलरायां पर नौ करोड़ दो लाख 71 हजार और संपूर्णानगर मिल पर 15 करोड़ 11 लाख 48 हजार रुपये बकाया है। यह बकाया धनराशि 14 दिन पूर्व तक स्थिति के मुताबिक है। 
 
भुगतान समय से कराने के लिए मिल मालिकों को समय-समय पर नोटिस जारी किया जा रहा हैं। बजाज ग्रुप की तीनों मिलों की चीन को अभिरक्षा में लिया गया है, जिससे बिक्री होने पर सबसे पहले किसानों को भुगतान कराया जा सके। इसके अलावा ऐरा मिल की चीनी अभिरक्षा में ली गई है। 
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जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी 


बैंक की लिमिट न होने से भुगतान में दिक्कतें आ रही हैं। प्रशासन ने चीनी स्टाक को अभिरक्षा में लिया है, जिसकी बिक्री होने पर 85 फीसदी भुगतान किसानों को किया जाता है। अभी बाजार में चीनी की बिक्री डाउन है।
सतीश श्रीवास्तव, पीआरओ, बजाज ग्रुप
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