लखीमपुर खीरी। मौसम ठंडा होने के साथ ही लोगों में सोरायसिस रोग का खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों 5-6 मरीज इस रोग से पीड़ित आ रहे हैं। उन्हें उचित परामर्श के साथ इलाज में लापरवाही न बरतने के लिए कहा जा रहा है।
जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया कि सोरायसिस के शुरुआती लक्षणों में त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते या दाद जैसे दिखते हैं। इसके बाद त्वचा पर लाल मोटे धब्बे, जिन पर सफेद रंग की पपड़ियां आ जाती हैं। उसमें खुजली या खून निकलने लगता है। त्वचा सूखी व काली पड़ जाती है। सफेद रंग की पपड़ी निकले लगती है। यह बीमारी आम तौर पर माता-पिता से संतान को मिलती हैं, पर कभी-कभी खुद भी हो जाती है।
कुछ मरीजों में सोरायसिस के साथ ही हाथ-पैर की अंगुलियों व जोड़ों में दर्द की शिकायत हो जाती है, जिसे सोरायटिक या गठिया कहते हैं। आम तौर पर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह लेकर इलाज करें, नहीं तो यह बीमारी गंभीर रूप धारण कर लेती हैं। कई मामलों में अंग प्रत्यारोण तक कराना पड़ सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
-शरीर को साफ रखें, लेकिन एक दिन छोड़कर नहाएं।
-शरीर पर नारियल का तेल का इस्तेमाल करें।
-नहाने से पहले व बाद में तेल से मालिश करें।
-कास्टिक वाले साबुन का इस्तेमाल न करें।
-स्वच्छ व सूखे कपड़े पहनें।
-प्रतिदिन अखरोट खाएं।
-शरीर में पानी की कमी न होने दें।
-अधिक गर्म पानी की जगह, गुनगुने पानी से नहाएं।
(जैसा कि त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपेंद्र गौतम ने बताया)