बांकेगंज। इस बार ज्येष्ठ माह में 13 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन शनिदेव का तेलाभिषेक और विधि-विधान से पूजन-अर्चन करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव को कम करने की मान्यता है।
छोटी काशी गोला के ज्योतिषाचार्य पं. रामदेव मिश्र शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष 16 मई, शनिवार को 13 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करना, काले तिल का दान देना और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। विशेष रूप से जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उनके लिए यह दिन महत्वपूर्ण माना गया है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि “ऊं शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप कर शनिदेव को सरसों या तिल का तेल अर्पित करने से जीवन की बाधाएं दूर होने की मान्यता है। संवाद