सपा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शुमार डॉ राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना की गति कुंद पड़ गई है। मेट्रो की ओर दौड़ लगा रही सरकार की प्राथमिकताओं में गांव की सड़कें शायद पीछे छूट गई हैं। इस योजना के तहत वर्ष 2015-16 में चयनित 39 में से 10 गांवों में 19.82 किमी सड़क बनाए जाने का लक्ष्य है, जिसके सापेक्ष अब तक 950 मीटर ही सड़क बनाई गई है। कार्यदायी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के मुताबिक बजट न मिलने से सड़कों का निर्माण कार्य बंद करना पड़ा है।
गांवों के विकास में पहली सीढ़ी यानी सड़क से ही सरकार का ध्यान हट गया है। खीरी में समग्र गांवों में सड़क निर्माण कार्य की प्रगति को देखकर ऐसा ही माना जा सकता है, क्योंकि 11 माह बीतने को हैैं लेकिन एक किमी सड़क नहीं बनाई जा सकी है। 10 समग्र गांवों में 19.82 किमी सड़क निर्माण का लक्ष्य तय है, जिसके निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रांतीय खंड, निर्माण खंड 1 और निर्माण खंड 3 को मिली है। इसमें प्रांतीय खंड को 4.27 किमी, निर्माण खंड 1 को 11.50 किमी और निर्माण खंड 3 को 4.05 किमी सड़क बनानी है, जिसके लिए 11 करोड़ 36 लाख 38 हजार रुपये की आवश्यकता थी। अब तक सरकार से तीनों निर्माण संस्थाओं को दो करोड़ 47 लाख 72 हजार रुपये ही मिले हैं, जिससे 950 मीटर सड़क की बनाई जा सकी है। इससे तीन गांव ही संतृप्त हो सके हैं, जबकि सात गांवों में सड़क निर्माण होना शेष है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सात गांवों में 18.87 किमी सड़क निर्माण कराया जाना है, जिसके लिए आठ करोड़ 88 लाख 66 हजार रुपये की जरूरत है। धनराशि की बावत विभाग ने उच्चाधिकारियों से कई बार मांग भी की, लेकिन इसके बावजूद मामले पर संज्ञान नहीं लिया जा रहा।
प्रांतीय खंड की प्रगति रह गई शून्य!
पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड को लाख 96 हजार धनराशि शासन से उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिसे शत प्रतिशत खर्च भी किया जा चुका है। इसके बावजूद इनकी प्रगति शून्य ही रह गई है, क्योंकि प्राप्त धनराशि से सिर्फ पत्थर ही डलवाया गया है। जबकि उस पर तारकूल आदि कार्य शेष है।
कुल डिमांड के सापेक्ष प्राप्त हुई 2.47 करोड़ की लागत से 950 मीटर सड़क कार्य कराया गया है। धनराशि प्राप्त होते ही कार्य फिर शुरू करा दिया जाएगा।
-अजय शंकर सिंह, अधिशासी अभियंता, प्रांतीय खंड