लखीमपुर खीरी। बदलती जीवनशैली, खान-पान में लापरवाही और समय पर इलाज न कराना अब लोगों के जोड़ों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जिले के अस्पतालों और क्लीनिकों में गठिया (अर्थराइटिस) के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा देखा जा रहा है। खासतौर पर 40 साल से अधिक उम्र के लोग और महिलाएं इसकी चपेट में तेजी से आ रहे हैं।
जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि प्रतिदिन की ओपीडी में करीब 60 प्रतिशत मरीज गठिया के ही आ रहे हैं। गठिया एक गंभीर बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न की समस्या होती है। शुरुआत में लक्षण हल्के होने के कारण लोग इसे नजर अंदाज कर देते हैं। यदि शुरूआत में ही इलाज शुरू कर दिया जाए तो इस बीमारी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन अधिकतर मरीज तब आते हैं जब हालत बिगड़ चुकी होती है।
बताया कि गठिया के अधिकांश मरीज लंबे समय तक दर्द को मामूली समझ कर घरेलू इलाज या बिना किसी चिकित्सक की सलाह के दर्द की दवा का सहारा लेते हैं। इससे रोग अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है और बाद में हड्डियों में स्थायी नुकसान तक हो सकता है। इसलिए संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और धूप लेना गठिया से बचाव में मददगार हो सकते हैं। अगर जोड़ों में सुबह अकड़न, सूजन या चलने में दर्द महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
इस वजह से बढ़ रहे मरीज
-विटामिन-डी की कमी। मोटापा, लगातार बैठे रहने की आदत और शारीरिक श्रम में कमी। महिलाएं, विशेषकर 40 वर्ष की आयु के बाद, कैल्शियम की कमी और हार्मोनल बदलावों के कारण तेजी से इसकी चपेट में आती हैं।