लखीमपुर खीरी। शहर में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है, लेकिन हालात यह हैं कि न तो बंदर काबू में हैं और न ही उनको पकड़ने की जिम्मेदारी तय हो सकी है। आए दिन लोगों पर हमले हो रहे हैं, महिलाएं और बच्चे दहशत में हैं, फिर भी जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। नतीजा यह है कि समस्या जस की तस बनी हुई है और शहरवासी खुद ही बचाव के उपाय करने के लिए मजबूर हैं।
बंदरों का आतंक वैसे तो पूरे शहर में है, लेकिन संकटा देवी, काशीनगर, बहादुर नगर, बलदेवनगर, वाईडी कॉलेज, पंजाबी काॅलोनी, राजगढ़, बरखेड़वा, हाथीपुर उत्तरी, आवास विकास और अर्जुनपुरवा आदि मोहल्ले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
बंदरों के बढ़ते आतंक से लोग दहशत के साये में जीने के लिए मजबूर हैं। महिलाएं छतों पर कपड़े सुखाने जाने से डर रही हैं। बच्चे घरों के बाहर खेलने से कतरा रहे हैं। कई जगह बंदरों के हमले में लोग चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन समस्या के समाधान को लेकर अब तक कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं आ रहा।
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नई बस्ती में युवक हमले में घायल
शहर के नई बस्ती मोहल्ला निवासी उमेश चंद्र साहनी बीते रविवार को घर से निकल रहे थे, तभी अचानक एक बंदर ने उन पर हमला कर दिया। हमले में उन्हें शरीर के कई हिस्सों में खरोंचें आईं, जिससे वे घायल हो गए।
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केस : 2
छत से गिरकर महिला घायल
शहर के मोहल्ला हाथीपुर निवासी रीता गुप्ता कुछ दिन पहले छत पर कपड़े उठाने गई थीं, तभी उनके करीब बंदरों का झुंड आ गया। डर की वजह से वह जीने से फिसलकर वे गिर गईं। इससे उनकी कमर व पैरों में चोट आ गई।
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घर की छत पर काफी बंदर आते हैं। उन्हें फल और अन्य खाद्य देते हैं, इससे वह नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। हालांकि, प्रशासन को बंदरों को पकड़वाना चाहिए, ताकि मानव और बंदरों के बीच संघर्ष न हो, साथ ही बंदरों को पर्याप्त मात्रा में भोजन मिल सके।
-प्रशांत सक्सेना, पशु प्रेमी
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शहर में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। महिलाओं और बच्चों का छत पर अकेले जाना मुश्किल हो गया है। बंदरों का झुंड आए दिन लोगों पर हमला कर देता है। प्रशासन को इन बंदरों को पकड़कर किसी सुरक्षित जगह पर भेजना चाहिए।
-रानू खान, नागरिक
जिले में इतने लोगों को लगी वैक्सीन की डोज
जिले में बंदरों के हमले से घायल होकर लगातार जिला अस्पताल व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर लोग पहुंच रहे हैं। वर्ष 2023 में 69,881, वर्ष 2024 में 79,033 और वर्ष 2025 में करीब 63502 लोगों को वैक्सीन की डोज लगी। हालांकि, इनमें करीब 30-40 प्रतिशत मरीज बंदरों के हमले में घायल होकर पहुंचे थे।
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तोड़ देते हैं पानी की टंकी और गमले
बंदर गमले, पानी की टंकियां व सोलर पैनल तोड़ देते हैं। कपड़े फाड़ देते हैं या फिर इधर-उधर फेंक देते हैं। अभी तक लोग गेहूं को छत पर सुखाते थे, लेकिन बंदरों के उत्पात से परेशान कई लोग गेहूं खरीदना बंद कर सीधे आटा लाने लगे हैं।
लोग खुद कर रहे ये उपाय
-छत व बालकनी में डंडा व गुलेल रखने लगे हैं।
-कहीं-कहीं लोग करंट का झटका मारने वाला तार डालने लगे।
-गमलों व सोलर पैनल को सुरक्षित रखने के लिए जाल लगाने लगे।
-पानी की टंकी पर लोग कांटेदार ढक्कन लगाने लगे
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शासनादेश के अनुसार क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने का काम वन विभाग का है। इसके लिए नगर पालिका के पास कोई बजट भी नहीं आता था और अब कार्य के लिए नगर पालिका का कोई मतलब भी नहीं है।
-संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका लखीमपुर
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आबादी क्षेत्र के बंदरों को पकड़ने के लिए किसकी जिम्मेदारी है, इस पर कोर्ट में केस चल रहा था। अभी इसमें कोई आदेश हुआ है, लेकिन इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं है। बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी पूर्ण रूप से वन विभाग की नहीं है। इसमें संबंधित नगर निकाय की जिम्मेदारी होती है।
-कीर्ति चौधरी, डीडी बफर जोन, दुधवा टाइगर रिजर्व
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शहर में पहले नगर पालिका बोर्ड फंड से बंदरों को पकड़वाने का कार्य कराया गया था। वर्तमान में यह जिम्मेदारी वन विभाग की है। हालांकि, यदि वन विभाग को किसी प्रकार की सहायता जैसे वाहन आदि की आवश्यकता होगी तो नगर पालिका सहयोग करेगी।
-डॉ. इरा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, नगर पालिका लखीमपुर
शहर के संकटा देवी मोहल्ले में घूमता बंदरों का झुंड। संवाद
शहर के संकटा देवी मोहल्ले में घूमता बंदरों का झुंड। संवाद