पांच साल बाद मार्च 2024 में पांच हजार रुपये रिश्वत देने पर 14 मार्च को पैमाइश तो हुई, पर दो दिन बाद ही विपक्षियों ने फिर मेड़बंदी तोड़ दी। इसके बाद उन्होंने इस मामले में अधिकारियों के काफी चक्कर लगाए, पर काम नहीं हुआ। उनके पांच हजार रुपये भी आज तक वापस नहीं हुए हैं। इसी को लेकर उन्होंने बीते अक्तूबर में सदर विधायक से अपनी पीड़ा बताई थी।
गन्ना सर्वे में पता चला था कि कम जमीन जोत रहे
विश्वेश्वर दयाल ने बताया कि उनका खेत कागजों में एक एकड़ आठ डिस्मिल है, पर वह मौके पर कम भूमि जोत रहे थे। वर्ष 2018 में जब चीनी मिल की ओर से गन्ना सर्वे कराया गया तो उन्हें पता चला कि वह कम जमीन जोत रहे हें। इसी के बाद उन्होंने अपने खेत की पक्की पैमाइश के लिए वाद दायर किया था।
सीडीओ/प्रभारी डीएम अभिषेक कुमार ने बताया कि मुझे इस मामले में स्थानीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसके बारे में एडीएम बता पाएंगे। एडीएम संजय कुमार सिंह ने बताया कि स्थानीय स्तर पर इस मामले में किसकी लापरवाही रही और क्या कार्रवाई हुई, इसके बारे में मुझे जानकारी नहीं है।
लंबित हैं पैमाइश के ढाई सौ के करीब मामले
जिले में इस समय पैमाइश के करीब ढाई सौ मामले लंबित हैं। इसमें सबसे ज्यादा सौ के करीब मामले सदर तहसील के हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर 50 मामले पलिया तहसील के हैं। इसी प्रकार गोला में 20, मितौली में एक, मोहम्मदी में 14 और निघासन में 17 और धौरहरा में 36 मामले लंबित हैं।
चार साल से दौड़ रहे बौधिया के पुरुषोत्तम
निघासन क्षेत्र के बौधिया निवासी पुरुषोत्तम ने बताया कि वह अपनी भूमि पैमाइश के लिए करीब चार साल से दौड़ रहे हैं। मुकदमा भी किया, लेकिन पैमाइश का आदेश होने के बाद भी अब तक सुनवाई नहीं हुई है।