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लाडलों के इंतजार में पथरा गईं गांव वालों की आंखें

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लखीमपुर खीरी। आंध्र प्रदेश के गुंटूर में शुक्रवार को कृष्णा नदी में डूबे तीन किशोरों का घटना के तीसरे दिन भी उनके घर शव नहीं पहुंच सका। उधर, परिजन समेत गांव वालों की अपने लाडलों के इंतजार में आंखें पथरा गईं।
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फरधान थाना क्षेत्र के नया गांव निवासी रामशंकर शुक्ला का छोटे पुत्र हर्षित शुक्ला 15 वर्ष की 10 दिसंबर को नदी में डूबकर मौत हो गई थी। लेकिन अभी तक उसका शव घर नहीं पहुंच सका है। हर्षित पांच साल पहले आंध्र प्रदेश के एक गुरुकुल में वैदिक शिक्षा ग्रहण करने गया था। परिजन का कहना है कि उनके पिता के पास खेती के लिए जमीन नहीं है इसीलिए हर्षित का बड़ा भाई असित और पिता लखीमपुर में प्राइवेट नौकरी कर घर का खर्च चलाते हैं। हर्षित की माता लक्ष्मी शुक्ल और बहन शिवानी घर की देखरेख करती हैं। बेटे की मौत सुनकर माता लक्ष्मी शुक्ल का रो-रो कर बुरा हाल है। एक तरफ उनकी उम्मीदें तो टूटी ही है साथ बेटा भी खो दिया। ग्रामीणों की माने तो हर्षित बहुत सरल स्वभाव का और मिलनसार था। जबकि गांव आता था तो सब से प्रेम भाव से मिलना उसकी एक फितरत थी। उसकी मौत से पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है। उसके शव को आने के लिए इंतजार है तीसरे दिन भी शव घर नहीं पहुंच सका। इसलिए अब चौथे दिन शव पहुंचने पर उसका अंतिम संस्कार होगा।
उधर, ईसानगर थाना क्षेत्र के ढखिनिया निवासी वीरेंद्र कुमार दीक्षित के पुत्र नितीश दीक्षित व इसी थाना क्षेत्र के चकमूसेपुर गांव निवासी अनिल त्रिवेदी के पुत्र शुभम के शव का भी ग्रामीणों और परिजन का इंतजार रहा। उधर, खबर पाकर उनके घर रिश्तेदार भी पहुंचने लगे हैं। ढखिनिया के ही राम सहारे, अनुपम, मदन आदि ने बताया कि गांव के सभी लोगों को नितीश का शव आने का इंतजार है और वह सब बेसब्री से रास्ता देख रहे हैं। वहीं, चकमूसेपुर में भी ज्यादातर गांव वाले शुभम के शव का आने का इंतजार करते रहे। नीलम, सुजीत, नरेश, आलोक का कहना है कि इस घटना ने सभी को झकझोर दिया है। दोनों गांवों में सन्नाटा पसरा है।
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