गोला गोकर्णनाथ। भाद्रपद पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण के सूतक काल से पूर्व पौराणिक शिव मंदिर के कपाट शृंगार पूजा व आरती के बाद रविवार दोपहर 12:46 पर बंद कर दिए गए।
पूर्णिमा पर पौराणिक शिव मंदिर के कपाट ब्रह्म मुहूर्त में भक्तों के दर्शनार्थ पांच बजे खुले थे। चंद्र ग्रहण के 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है। इससे पूर्व पूजन आरती, शृंगार पूजा के बाद पौराणिक शिव मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। शिव मंदिर के प्रधान पुजारी दिनेश कुमार मिश्र पूर्वाह्न 10 बजे मंदिर पहुंचे और परिसर के अन्य देवालयों में पूजन के बाद गर्भ ग्रह में प्रवेश किया।
गर्भ ग्रह की सफाई के बाद दुग्ध, दही, जल, गंगा जल से शिव को स्नान कराया। बिल्व पत्र, दूर्वा, पुष्प, कमल, धूप, दीप मिष्ठान से पूजन एवं भोग लगाया। वस्त्र, मुकुट आदि पहनाकर भगवान शिव का शृंगार किया। इस विशेष पूजन के दौरान मंदिर परिसर शिव स्त्रोत, घंटानाद से गूंजायमान होता रहा। पूजन के बाद शिव मंदिर के कपाट सोमवार के बह्म मुहूर्त में पांच तक के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर पहुंचे शिव भक्त मंदिर के गर्भग्रह के द्वार पर मस्तक टेककर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि की कामना कर वापस लौटे।
सूतक काल में नगर में राम जानकी मंदिर, लक्ष्मी नारायण मंदिर, मां दुर्गा मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर सहित विभिन्न देवालयों के द्वार भी बंद कर दिए गए।
सूतक काल में पौराणिक शिव मंदिर के बंद द्वार पर जल अर्पित करते श्रद्धालु। संवाद