लखीमपुर खीरी। मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। कई जरूरी दवाएं पिछले करीब छह माह से अस्पताल में उपलब्ध नहीं हैं। दवा काउंटर पर मरीजों को पूरी दवा नहीं मिल रही। बाकी दवाएं बाहर से खरीदने के लिए कहा जा रहा है। इससे मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में इन दिनों रोज करीब 800 से 1000 नए मरीजों का पंजीकरण हो रहा है। सोमवार को अवकाश के बाद मरीजों की लंबी लाइन लगी। मरीजों ने पर्चा बनवाकर डॉक्टर को दिखाया। इसके बाद दवा काउंटर पर पहुंचे तो आधी-अधूरी दवा मिली। तीमारदार रोहित ने बताया कि टेलमी सरटेन और लेसिक्स करीब छह माह से नहीं मिल रही हैं।
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डॉक्टर ने दवाएं लिखीं, लेकिन काउंटर पर कुछ ही दवाएं मिलीं। बाकी बाहर से खरीदनी पड़ीं।
-गेंदां, मरीज, निवासी हरदी
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लोग मुफ्त इलाज की उम्मीद में अस्पताल आते हैं, लेकिन दवाएं पूरी नहीं मिलने पर बाहर से खरीदनी पड़ती हैं।
-रामेंद्र, तीमारदार, लालपुर
इन दवाओं की कमी
डाइक्लो, लेसिक्स, इको स्प्रिन 75 हार्ट, पेंट्रापाजोल, एमॉक्सीलिन 625, मल्टी विटामिन, एम्ब्राबोराल, टेलमी सरटेन, डाइफ्लोजाकार्ड, डॉक्सी साइक्लिन, पैरासिटामॉल, शुगर स्ट्रिप, एंटासिड सहित कई अन्य जरूरी दवाएं।
दो माह से लिफ्ट खराब, फूल रही मरीजों की सांस
जिला अस्पताल की लिफ्ट करीब दो माह से खराब है। इससे तीसरी मंजिल के वार्ड तक पहुंचने में मरीजों और तीमारदारों को परेशानी हो रही है। उन्हें बार-बार सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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न्यायालय गए रेडियोलॉजिस्ट, नहीं हुए अल्ट्रासाउंड
रेडियोलॉजी विभाग में रोज करीब 60 से 70 अल्ट्रासाउंड होते हैं। सोमवार को डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीज अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचे तो सेवा बंद होने का नोटिस लगा मिला। मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
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इन दवाओं का क्या है काम
डाइक्लो टेबलेट दर्द से राहत के लिए दी जाती है। एमॉक्सी 625 एंटीबायोटिक दवा है। लेसिक्स शरीर में जमा अतिरिक्त पानी और नमक को पेशाब के रास्ते बाहर निकालती है। इसका इस्तेमाल हाई ब्लड प्रेशर कम करने में भी किया जाता है। टेलीसरटेन भी ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए दी जाती है।
अस्पताल में कोई जरूरी दवा उपलब्ध नहीं है तो आयुष्मान भारत, रोगी कल्याण और यूजर चार्ज के तहत सीएमएस इमरजेंसी में दवाएं खरीद सकते हैं। महाविद्यालय में दवा खरीदने की प्रक्रिया में कुछ समय लगता है।
-डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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दवाएं खत्म होने से पहले ही निगम को पत्र भेजा जाता है और प्राचार्य को भी जानकारी दी जाती है। दवा उपलब्ध नहीं होने पर अस्पताल परिसर स्थित पीएम जन औषधि केंद्र से दवा उपलब्ध कराई जाती है।
-डॉ. आरके कोली, सीएमएस
अल्ट्रासाउंड बंद होने पर लगा नोटिस बोर्ड। संवाद- फोटो : Samvad
अल्ट्रासाउंड बंद होने पर लगा नोटिस बोर्ड। संवाद- फोटो : Samvad
अल्ट्रासाउंड बंद होने पर लगा नोटिस बोर्ड। संवाद- फोटो : Samvad