महेंवागंज। गंगाबेहड़ गांव में शनिवार देर शाम तेंदुए के हमले में बालक की मौत के बाद से ही ग्रामीणों में आक्रोश है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने की कार्रवाई शुरू की तो लोग भड़क गए।
परिजन और गांव वाले तेंदुए को पकड़ने और मुआवजा देने के बाद ही शव ले जाने देने की जिद पर अड़ गए थे। पुलिस और वन अधिकारियों ने काफी देर मान मनौव्वल किया, पर बात नहीं बनी। रात भर शव घर में रखा रहा। पुलिस और राजस्व अधिकारी रविवार सुबह फिर पीड़ित के घर पहुंचे। मुआवजा और आवास के आश्वासन पर परिजन माने। पुलिस ने सुबह दस बजे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
वनकर्मियों की लापरवाही को लेकर गांव वालों का फूटा गुस्सा
ग्रामीणों का कहना है कि कई दिनों से इलाके में हिंसक वन्यजीव देखा जा रहा था। सूचना के बाद भी वनकर्मी लापरवाह बने रहे। इस बीच रविवार सुबह गन्ने की पत्ती छील रहे युवक पर हिंसक पशु के हमले की दूसरी खबर आ गई तो गांव वालों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर उसी वक्त वन विभाग कोई कारगर कोशिश करता तो तेंदुआ पकड़ा जा सकता था। सीओ सदर रमेश तिवारी ने बताया कि पथराव और बवाल में कोई चोटिल नहीं हुआ है। पुलिस जीप का शीशा टूटा है। किसी पर अभी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। रविवार शाम तक बच्चे का अंतिम संस्कार होने तक एहतियातन कई थानों की फोर्स मौके पर डटी रही।
हादसे के बाद जागा विभाग, पिंजरे और कैमरे लगवाए
गंगाबेहड गांव चारों ओर से गन्ने की फसल से घिरा है। चंद मीटर पर इंदिरा मनोरंजन वन और राजकीय कृषि प्रक्षेत्र भी है। पिछले काफी दिनों से यहां तेंदुए की चहल कदमी बनी है। शनिवार को गंगाबेहड़ में बालक और रविवार को युवक पर हमले की घटना से इलाके में फिर सनसनी फैल गई है। रविवार को काफी बवाल और फजीहत के बाद वन कर्मियों ने घटना स्थल के आस-पास दो पिंजरे, चार ट्रैकिंग कैमरे लगाए और काफी दूरी तक जाल बिछाया है। वहीं तीन टीम गश्त कर रही हैं।