संवाद न्यूज एजेंसीलखीमपुर खीरी। मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं से जिले का माहौल बिगड़ रहा है। शांति-व्यवस्था प्रभावित हो रही है। सड़क पर शव रखकर विरोध-प्रदर्शन अब पथराव तक पहुंच गया है। दो माह में जिले में कई स्थानों पर पुलिस-प्रशासन को विरोध झेलना पड़ा है। भड़के ग्रामीणोंं को समझाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी है।
27 जुलाई को बाघ ने इमलिया गांव के अमरेश कुमार को निवाला बनाया तो परिजनों ने शव सड़क पर रखकर करीब छह घंटे तक विरोध-प्रदर्शन किया। पुलिस-प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। वन मंत्री को जिले में आना पड़ा। इस घटना के करीब 24 दिन बाद बाघ ने मूड़ा अस्सी निवासी जाकिर अली को मार डाला तो एक बार फिर इसी तरह के हालत बने। पुलिस और वन विभाग को ग्रामीणों का गुस्सा झेलना पड़ा। जिले की कानून व्यवस्था प्रभावित हुई।
रेंज कार्यालय का भी किया गया घेराव
मोहम्मदी-महेशपुर रेंज के गांव भदैया निवासी तेजपाल पर हमले के बाद हालात और खराब हो गए। ग्रामीणों ने महेशपुर रेंज कार्यालय का घेराव किया। ग्रामीण करीब एक घंटे तक रेंज कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते रहे। मोहम्मदी-गोला मार्ग पर वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। यहां भी पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
घटनास्थल पर ही छह घंटे तक रखा रहा था शव
वन्यजीव के हमले में एक अक्तूबर को मोहम्मदी के शाहपुर राजा गांव निवासी प्रभूदयाल की मौत के बाद भी कानून व्यवस्था बिगड़ी थी। परिजन मृतक का शव छह घंटे से अधिक समय तक घटनास्थल पर ही रखे रहे। विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह और एसडीएम मोहम्मदी के समझाने पर परिजन माने थे। रविवार को मानव वन्यजीव संघर्ष से भड़के आक्रोश ने बड़ा रूप ले लिया। प्रदर्शन कर रहे परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस और वन विभाग की टीम पर पथराव किया। गाड़ियों के शीशे टूट गए। पीएसी लगानी पड़ी।
जिले में कई स्थानों पर पनप रहा आक्रोश
मोहम्मदी- महेशपुर रेंज के गांवों, धौरहरा के कई गांव में वन्यजीव के हमले से दहशत और आक्रोश है। फूलबेहड़ क्षेत्र में खंभारखेड़ा और आसपास गांवों में भी ग्रामीण आक्रोशित हैं। जिले में कई अन्य स्थानों पर भी इन हमलों से ग्रामीण आक्रोशित हैं।