लखीमपुर खीरी। सरकारी निर्माण कार्यों के शिलापट पर निर्माण कार्य का नाम, लागत, काम की समयावधि आदि काफी कुछ लिखा जाना चाहिए, लेकिन जिले में लागत छिपाई जा रही है, जो एक बड़े गोलमाल की ओर इशारा करती है।
नगर पालिका, नगर पंचायत, लोक निर्माण विभाग, आरईएसस, जिला पंचायत आदि लगभग सभी विभागों की ओर से होने वाले निर्माण कार्यों के शिलापट पर लागत नहीं लिखी जा रही है, जबकि शासनादेश है कि निर्माण कार्य के साथ ही उसकी लागत भी लिखी जाए। रमियाबेहड़ ब्लाॅक के जटपुरा में जिला पंचायत का एक शिलापट लगा है, जिसमें सड़क निर्माण का नाम तो लिखा है, लेकिन लागत नहीं।
मैलानी में विधायक निधि से इंटरलॉकिंग कार्य के शिलापट पर लागत नहीं लिखी है, जबकि कार्य का नाम, लोकार्पण करने वाले अतिथि का नाम आदि सब कुछ लिखा है। मैलानी में ही नगर पंचायत से हॉटमिक्स सड़क निर्माण के शिलापट पर काफी कुछ लिखा है, पर लागत नहीं। बरबर नगर पंचायत में आंबेडर पार्क निर्माण के शिलापट पर भी लागत का जिक्र नहीं किया गया है।
खीरी टाउन नगर पंचायत में नाली और सीसी रोड का शिलापट है, लेकिन लागत का जिक्र नहीं है। गोला सीएचसी पर रैन बसेरे का निर्माण कराया गया, शिलापट भी लगा, लेकिन उसकी लागत नहीं लिखी गई। मोहम्मदी मियांपुर में स्मृति द्वार पर लागत नहीं लिखी गई। नगर पंचायत खीरी टाउन में इंटरलॉकिंग निर्माण में भी लागत का जिक्र नहीं किया। इसी तरह लखीमपुर शहर में अधिकांश निर्माण कार्यों के शिलापट पर लागत नहीं लिखी गई।
निर्माण कार्यों के शिलापट पर निर्माण कार्यों की जानकारी के साथ ही लागत भी लिखा जाना अनिवार्य है। अगर कहीं लागत नहीं लिखी जा रही है तो वह गलत है। जांच कराई जाएगी और संबंधित विभाग की जवाबदेही तय की जाएगी। -अभिषेक कुमार, सीडीओ
गोला के सीएचसी में रैन बसेरा के शिलापट पर नहीं लिखी लागत। संवाद
गोला के सीएचसी में रैन बसेरा के शिलापट पर नहीं लिखी लागत। संवाद
गोला के सीएचसी में रैन बसेरा के शिलापट पर नहीं लिखी लागत। संवाद