खतरा अभी टला नहीं, बाघिन के पकड़ने तक जारी रहेगा यह अभियान
पकड़े गए बाघ को कर्तनियाघाट ले जाया गया, डीएम-एसपी पहुंचे खैरटिया
लखीमपुर खीरी। चार इंसानों और एक पशु को मारने वाली बाघिन को पकड़ने के लिए वन विभाग के दस दिन से चल रहे अभियान में मंगलवार की रात बाघिन की जगह बाघ पिंजरे में कैद हो गया। बाघिन अब भी पकड़ से बाहर है। वनाधिकारियों का कहना है कि बाघिन को पकड़ने के लिए अभियान अभी जारी रहेगा।
सोमवार को खैरागौढ़ी में बाघ के हमले में एक महिला मिंदर कौर के मारे जाने के बाद वन विभाग ने अपने सर्च अभियान को और तेज किया था। बाघिन को पकड़ने के लिए एक पिंजरा बाघिन के पहले शिकार महंत मोहनदास की कुटी के पास लगाया गया था। इसके अलावा आधा आधा किलोमीटर की दूरी पर तीन और पिंजरे लगाए गए थे। बीती रात तिकुनिया रोड पर लगे पिंजरे में बाघ कैद हुआ है। बाघ को फंसाने के लिए पिंजरे में बकरा बांधा गया था।
बताते हैं कि जिस समय बाघ पिंजरे में कैद हुआ उस समय बाघिन भी साथ थी जो काफी देर तक पिंजरे के आसपास मंडराती रही। वन विभाग ने किसी तरह सर्च लाइट डालकर बाघिन को वहां से हटाया। बाघिन के हटने के बाद बाघ को पिंजरा समेत ट्रक के जरिए कर्तनियाघाट वन्यजीव विहार ले जाया गया। दुधवा टाइगर रिजर्व के पशु चिकित्सक डॉ. दया शंकर ने पिंजरे में कैद जानवर के नर बाघ होने की पुष्टि की है। बाघ के पकड़े जाने की सूचना मिलते ही दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक, उप निदेशक बफर जोन सुंदरेश मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बाघ पकड़े जाने की सूचना प्रधान मुख्य वन संरक्षक और बाघ संरक्षण प्राधिकरण को दे दी है। हालांकि वनाधिकारियों का मानना है कि बाघिन पकड़ से बाहर होने के कारण खतरा अभी टला नही है। इसलिए वन विभाग बाघिन को पकड़ने के लिए अपना अभियान जारी रखेगा।
पिछले दस दिनों के अंदर चार इंसान और एक पशु बाघ का शिकार बन चुके हैं। बाघ हमले में दो मवेशी घायल हुए हैं। पगचिह्नों और कैमरे में ट्रैप हुई तस्वीरों के आधार पर वन विभाग ने हमलावर जानवर को बाघिन बताया था। बाद में बताया गया कि बाघिन एक नहीं दो हैं, जबकि अब बताया जा रहा बाघ और बाघिन का जोड़ा मिलकर शिकार कर रहे थे। इनमें बाघ पकड़ा गया है। वन विभाग ने यह भी संभावना जताई है कि बाघिन संभवत: गर्भवती है। बाघ शिकार करने के बाद उसे बाघिन के साथ मिलकर खा रहा था। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक का कहना है बाघिन के पकड़ में न आने से खतरा अभी टला नहीं है। इसलिए अभियान को अभी जारी रखा जाएगा और जल्दी ही बाघिन को भी पिंजरे में कैद करने या फिर ट्रैंकुलाइज करने का प्रयास किया जाएगा।
पिछले दस दिनों में बाघिन ने किया चार इंसानों का शिकार
18 जून- खैरिटिया गांव में राम जानकी मंदिर के पुजारी महंत मोहन दास (52) को बाघिन ने निवाला बनाया।
20 जून- खैरटिया गांव में घुसकर एक बछड़े को बाघिन ने निवाला बनाया, गाय को घायल किया।
23 जून- खैरटिया जंगल के किनारे पशु चरा रहे 14 वर्षीय किशोर सूरज सिंह को बाघिन ने निवाला बनाया।
25 जून-मंझरा पूरब जंगल में चर रही भैंसों पर बाघिन का हमला, दो भैंसे घायल।
26 जून- नरेंद्रनगर बेली के 33 वर्षीय युवक नगेंद्र सिंह को बाघिन ने उस समय निवाला बनाया जब वह खेत में घास काट रहा था। रात दस बजे नगेंद्र सिह का अधखाया शव बरामद।
27 जून-खैरी गौढ़ी गांव निवासी बंता सिंह की 40 वर्षीया पत्नी मिंदो कौर को बाघिन ने खेत में निवाला बनाया।