थारू जनजाति की शिल्प कला को देश भर में पहचान दिलाने और पलिया क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी नितीश कुमार ने थारू शिल्प ग्राम की कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत थारू हैरिटेज वर्कशेड, शिल्प विक्रय/प्रदर्शन केंद्र और पर्यटन गेस्ट हाउस खोले जाएंगे। इसके लिए पलिया से दुधवा के बीच स्थलों के चयन के लिए पलिया एसडीएम और खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं।
कार्ययोजना के मुताबिक वर्ष 2015-16 में बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत थारू गांवों में सामाजिक विकास और क्षमता संवर्द्धन के लिए थारू शिल्प ग्राम की स्थापना की जा रही है। इसके तहत थारू जनजाति के परंपरागत हस्तशिल्प, हथकरघा, जूट एवं बांस से किए जाने वाले बेहतरीन कारीगारी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। थारू शिल्प ग्राम एक ऐसा स्थल होगा, जहां थारू हेरीटेज वर्कशेड होगा। जिसमें महिलाएं एकत्र होकर हस्तशिल्प, हथकरघा, जूट के परंपरागत सामान,बेडशीड पर ट्राइवल/थारू कढ़ाई, बांस के बेहतरीन उत्पादों का निर्माण करेंगी। इस वर्कशेड में 1000 महिलाएं शिफ्ट में कार्य करेंगी। उत्पादित सामग्री के प्रदर्शन और बिक्री के लिए 10 दुकानों एवं केंद्रों का निर्माण कराया जाएगा ताकि दुधवा नेशनल पार्क भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटक इसकी खरीदारी कर सकें।
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थारू संगीतालय का होगा निर्माण
थारू जनजाति अपने परंपरागत गीत एव संगीत के लिए प्रसिद्ध है लेकिन अब यह लुप्त होता जा रहा है। शिल्प ग्राम में एक ऐसा संगीतालय का निर्माण कराया जाएगा, जहां थारू जनजाति के गीत, संगीत और नृत्य का प्रदर्शन किया जा सके।
ड्रेस डिजाइनिंग के लिए खुलेगा प्रशिक्षण केंद्र
थारू जनजाति की महिलाओं द्वारा परंपरागत रूप से पहने जाने वाले परिधानों घंघरिया, उनिया, अंगिया, पैड़ा को आधुनिक एवं परंपरागत रूप से मिश्रण करते हुए उनके ड्रेस डिजाइनिंग प्रशिक्षण के लिए केंद्र का प्रावधान किया गया है।
इन केंद्रों का होगा निर्माण
-एक थारू हेरिटेज वर्कशेड, 10 थारू शिल्प विक्रय/प्रदर्शन केंद्र, एक थारू शिल्प/वस्त्र प्रशिक्षण केंद्र, एक थारू रेस्टोरेंट, चार थारू हट, एक थारू नृत्य संगीत केंद्र, अन्य कार्य
थारू शिल्प ग्राम की अवधारणा जिला प्रशासन की है। इससे 24 ग्रामों में रह रहे थारू जनजाति के लोगों को रोजगार मिलेगा। बार्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत कार्ययोजना की स्वीकृत के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। इस बाबत एसडीओ और खंड विकास अधिकारी को उपयुक्त जगह चयन करने और बजट का आंकलन कर दो दिन में प्रस्ताव जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
-नितीश कुमार, सीडीओ