बेलरायां कड़िया मार्ग के गोआश्रय में मौजूद गोवंश। संवाद
बेलरायां। बॉर्डर की ग्राम पंचायतों में अस्थायी गोआश्रय स्थल टिनशेड के बजाय घासफूस की झोंपड़ियों में संचालित हो रहे हैं। गोआश्रय स्थलों में भूसा, चारा, पानी आदि का संकट है। पशु प्रेमियों ने गोआश्रय में गोवंश का भरण पोषण दुरुस्त कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने गोआश्रय स्थलों में गोवंशों के भरणपोषण के लिए प्रति गोवंश 15 सौ रुपये पशुपालकों को देना शुरू किया है। प्रति गोवंश 15 सौ रुपये प्रति माह मिलने के चलते ग्रामीणों ने मार्गों में भटक रहे छुट्टा गोवंशों को बेरहमी से पकड़कर जर्जर घासफूस की झोंपड़ियों में कैदकर कमाई करना शुरू कर दिया है।
ग्रामीणों ने कड़िया बेलरायां मार्ग, ग्राम डांगा में घासफूस की झोंपड़ियों में अस्थायी गोआश्रय बनाकर करीब सौ गोवंशों को कैद कर लिया है। गोआश्रय में हरा चारा, भूसा और पुवाल की कोई व्यवस्था नहीं है। गोवंशों को जीवित रखने के लिए खेताें खलिहानों और तालाबों के आसपास की घास चराकर पेट भरना शुरू किया है। बरसात होने पर गो आश्रय में कैद गोवंश कई दिन भूखों रहने को विवश जाते हैं।
बेलरायां कड़िया मार्ग किनारे में बने गोआश्रय स्थलों की जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - जयेश कुमार, बीडीओ निघासन