संकटा देवी मंदिर के बंद रहे कपाट। संवाद
लखीमपुर खीरी। चंद्र ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए शहर के मंदिरों के कपाट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। सुबह नियमित आरती के बाद मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए, जिन्हें शाम सवा सात बजे खोला गया। संकटा देवी मंदिर आरती समिति के सदस्य कमल मिश्रा ने बताया कि ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की विधिवत शुद्धि की गई। इसके उपरांत भगवान का विशेष श्रृंगार, भोग अर्पण और संध्या आरती संपन्न हुई।
हिंदू धर्म में चंद्र ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है। मान्यता है कि ग्रहण काल में वातावरण में सूक्ष्म नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं, जिससे पूजा-पाठ और देव प्रतिमाओं को स्पर्श करना वर्जित माना गया है। इसी परंपरा के तहत ग्रहण अवधि में मंदिरों के कपाट बंद रखे जाते हैं। ग्रहण समाप्ति के बाद गंगाजल से शुद्धिकरण कर नियमित दर्शन-पूजन पुनः आरंभ किया जाता है। संवाद
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सूतक काल में बंद रहे पौराणिक शिव मंदिर के कपाट
गोला गोकर्णनाथ। मंगलवार को चंद्रग्रहण के सूतक काल में पौराणिक शिव मंदिर के कपाट बंद रहे। श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की चौखट पर माथा टेककर लौटे। साथ ही शहर के अन्य मंदिरों के द्वार भी सूतक काल में बंद रहे। धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, मंदिरों में सूतक काल के दौरान दर्शन, पूजन, मूर्ति स्पर्श और अनुष्ठान वर्जित हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद शाम को मंदिर परिसर की विशेष धुलाई, सफाई और शुद्धिकरण किया गया। इसके उपरांत सायंकाल विधिवत पूजन-अर्चना के बाद कपाट खोल दिए गए। देर शाम तक श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के मंदिर में दर्शन, पूजन कर जलाभिषेक किया और हर-हर महादेव के जयकारे लगाए। संवाद