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Lakhimpur Kheri News: प्लास्टिक को पछाड़ रही गन्ने की खोई की थाली

Sun, 28 Jun 2026 11:31 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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रिंकू
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लखीमपुर खीरी। कभी चीनी बनाने के बाद बेकार मानी जाने वाली गन्ने की खोई (बैगास) अब डिस्पोजेबल बर्तनों के रूप में प्लास्टिक और थर्माकोल को कड़ी चुनौती दे रही है। शादी-विवाह, भंडारों, धार्मिक आयोजनों से लेकर घरों तक खोई से बनी थाली, प्लेट, कटोरी और गिलास का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।
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बाजार में ये बर्तन आकार और गुणवत्ता के अनुसार 150 से 350 रुपये प्रति सैकड़ा तक उपलब्ध हैं। विक्रेताओं के अनुसार, ग्राहक अब खुद प्लास्टिक के बजाय इको-फ्रेंडली विकल्प मांग रहे हैं। खोई से बने बर्तन गर्म भोजन में भी आसानी से इस्तेमाल किए जा सकते हैं और प्लास्टिक की तुलना में अधिक मजबूत माने जाते हैं।
दुकानदारों ने बताया कि लखीमपुर के बाजार में इनकी आपूर्ति मुख्य रूप से लखनऊ और सीतापुर से होती है, जबकि सबसे बड़ा थोक बाजार कानपुर है। यहीं से प्रदेश के साथ अन्य राज्यों में भी सप्लाई होती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, खोई से बने बर्तन प्राकृतिक रूप से गल जाते हैं, जिससे प्लास्टिक कचरा कम होता है। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

गन्ने की खोई से ऐसे बनते हैं इको-फ्रेंडली डिस्पोजेबल बर्तन
गन्ने की खोई (बैगास) से बनने वाले डिस्पोजेबल थाली, प्लेट, कटोरी और गिलास प्राकृतिक प्रक्रिया से तैयार किए जाते हैं। दुकानदारों के अनुसार चीनी मिलों में गन्ने का रस निकालने के बाद बची खोई को बर्तन बनाने वाली फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। फैक्टरी में पहले खोई की सफाई की जाती है। इसके बाद उसे पीसकर पानी के साथ गाढ़े पल्प में बदला जाता है। इस पल्प को विशेष सांचों में डालकर उच्च तापमान और दबाव वाली मशीनों से आकार दिया जाता है, जिससे मजबूत और टिकाऊ बर्तन तैयार होते हैं। बाद में किनारों की कटाई, गुणवत्ता जांच और जीवाणु-मुक्त करने की प्रक्रिया के बाद इन्हें पैक किया जाता है। दुकानदारों का कहना है कि ये बर्तन पानी और तेल से आसानी से प्रभावित नहीं होते। उपयोग के बाद प्राकृतिक रूप से गलकर मिट्टी में मिल जाते हैं, इसलिए इन्हें बायोडिग्रेडेबल और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प माना जाता है।


ग्राहक अब खुद प्लास्टिक और थर्माकोल की जगह गन्ने की खोई से बने बर्तन मांग रहे हैं। मजबूत होने और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाने के कारण इनकी बिक्री लगातार बढ़ रही है।
-रिंकू गुप्ता, विक्रेता

गर्म भोजन में भी ये बर्तन खराब नहीं होते। अब शादी-ब्याह और धार्मिक आयोजनों में भी इनकी मांग पहले से काफी बढ़ गई है। हाथ में पकड़ने में भी यह आरामदायक रहते हैं।
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-प्रातुल गुप्ता, विक्रेता

रिंकू

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