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नसबंदी कैंप में आपरेशन के दौरान महिला की मौत

Sat, 21 Jan 2017 10:54 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मोहम्मदी (खीरी)।
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माौत पर हंगामा - फोटो : अमर उजाला
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गुस्साए परिवार वालों ने किया हंगामा, लगाया जाम
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पुलिस के समझाने पर 40 मिनट बाद खुला जाम
डॉक्टर पर एफआईआर दर्ज कराने को दी तहरीर
विभाग ने आनन-फानन में कराया पोस्टमार्टम, दिया मुआवजा
 क्षेत्र के गांव लखा निवासी एक महिला की मोहम्मदी सीएचसी में शुक्रवार को नसबंदी कैंप में ऑपरेशन के दौरान हालत बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन में उसे जिला अस्पताल भेज दिया। रास्ते में महिला ने दम तोड़ दिया। वहीं चिकित्साधिकारियों ने विभागीय गलती को दबाने का भरसक प्रयास करते हुए शुक्रवार की रात में ही महिला का पोस्टमार्टम कराकर शव उसके घर भेजवा दिया। इधर शनिवार को गुस्साए परिवार वालों ने हंगामा कर डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की न सिर्फ मांग की, बल्कि तहरीर भी दे दी, लेकिन पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
सीएचसी मोहम्मदी पर शुक्रवार को नसबंदी कैंप लगाया गया था, जिसमें जिला मुख्यालय से आए डॉ अखिलेश वर्मा तथा स्टाफ नर्स सीमा श्रीवास्तव ने सीएचसी स्टाफ की सहायता से नौ महिलाओं के ऑपरेशन किए, जिसमें ग्राम लखा निवासी पप्पू की पत्नी 36 वर्षीय मंदो का ऑपरेशन शाम करीब पांच बजे किया गया। डॉ अखिलेश का कहना है कि ऑपरेशन के दौरान ही महिला की हालत बिगड़ गई। टीम की सलाह पर उसे 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका के पति पप्पू का कहना है कि महिला की मौत की जानकारी डॉक्टरों को पहले से थी, इसीलिए आनन फानन में रात में ही उसके शव का पोस्टमार्टम कर उसे घर भिजवा दिया गया। इतना ही नहीं पीड़ित परिवार को मनाकर कार्रवाई से बचने के लिए सीएमओ ने तत्काल आंशिक तौर पर 50 हजार मुआवजा दिया। मजदूर पेशा पप्पू का कहना है कि रात में उसकी कुछ समझ में नहीं आया, लेकिन डॉक्टरों ने लापरवाही न की होती तो उसकी पत्नी की जान नहीं जाती, इसलिए दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई होनी चाहिए। यह सोचकर ही उसने ग्रामीणों के साथ शनिवार की सुबह डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा करते हुए मोहम्मदी मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम लगने के कुछ देर बाद पहुंची पुलिस के समझाने पर वह मान गए। जाम खोलने के बाद थाने में डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। हालांकि पुलिस ने मामले को दर्ज नहीं किया है। 
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तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है, जो पूरे मामले की जांच  कर रिपोर्ट दो दिन में सौंपेगी। पीड़ित परिवार को दो लाख रुपये सरकारी  मुआवजा दिलाया जाएगा। फिलहाल 50 हजार रुपये रोगी कल्याण निधि से दिए गए  हैं। 
-डॉ जावेद अहमद, सीएमओ।

 
महिला की मौत से सामने आई लापरवाही की हकीकत
स्वास्थ्य विभाग जहां नसबंदी कार्यक्रम पर जोर दे रहा है, वहीं ऑपरेशन के दौरान अव्यवस्था और डॉक्टरों की लापरवाही एक आम बात हो गई है। अब तक पर्याप्त प्रकाश न होने, स्टाफ के अभाव और सुविधाओं की ओर ध्यान न देने के आरोप लगते आ रहे थे, लेकिन शुक्रवार को मोहम्मदी सीएचसी में ऑपरेशन के दौरान महिला की हालत बिगड़ने से मौत से डॉक्टरों की लापरवाही की हकीकत सामने आ गई है। हालांकि सीएमओ डॉ जावेद अहमद कहते हैं कि उसे शॉक लग गया, जिससे मौत हो गई।
 
अफरा-तफरी के बाद लेबररूम में जड़ा ताला
इस घटना के बाद सीएचसी में अफरातफरी मच गई। नसबंदी के लिए आई महिलाओं में खलबली मच गई। सीएचसी स्टाफ ने लेबररूम में ताला डाल दिया। शनिवार को घटना की बाबत कोई कुछ भी बताने को तैयार नहीं था। यहां तक कि संबंधित अभिलेख भी लेबररूम में बंद होने की बात कही गई।
 
मामले की हो जांच
मंदो अपने पीछे चार बच्चे छोड़ गई है, जिसमें बड़ा पुत्र 18 वर्षीय सलमान, 16 वर्षीय गुड्डे बाहर नौकरी करते हैं। जबकि तीसरे नंबर की पुत्री आठ वर्षीय शबनम तथा दो वर्षीय पुत्र रमजानी उसके साथ रहते थे। गरीबी के चलते परिवार को सीमित रखने के लिए उसने नसबंदी कराने का निर्णय लिया था। मृतका के जेठ लियाकत ने डॉक्टरों की लापरवाही से मंदो की मौत का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। 
 
शव का नहीं किया अंतिम संस्कार
परिवार पर प्रशासन रिपोर्ट न दर्ज कराने का दबाव डाल रहा है। वहीं महिला के पुत्र नेपाल में मजदूरी करते हैं। शनिवार की शाम तक वह नहीं आ सके, जिससे परिवार वालों ने महिला के शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। 
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हार्ट अटैक से मौत
कैंप में लैप्रोस्कोपी मशीन से आपरेशन किए गए, जिस दौरान मंदो की हालत बिगड़ी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। 
 
सीएमओ करते रहे टालमटोल
महिला के ऑपरेशन और पोस्टमार्टम की बाबत सीएमओ डॉ जावेद अहमद टालमटोल करते रहे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बाबत पूछ जाने पर भी सीएमओ ने जानकारी से इंकार कर दिया।
 
डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही के आरोप की तहरीर मिली है, जिस पर उच्चाधिकारियों से विचार विमर्श और जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
-जीएस पांडे, प्रभारी निरीक्षक, कोतवाली-मोहम्मदी
 
ऑपरेशन के दौरान जब महिला की हालत खराब हुई तो उसे तुरंत जीवन रक्षक दवाइयां देने के साथ एंबुलेंस से जिला अस्पताल भेजा गया था। 
-डॉ सुरेंद्र कुमार, अधीक्षक-सीएचसी।
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