लखीमपुर खीरी। ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर कई योजनाएं चर्लाइं गईं और करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। इसके बावजूद कहीं भी धरातल पर इनका लाभ मिलता नहीं दिखता। खेल मैदान भी अब वजूद में नहीं हैं, जहां हैं तो वहां झाड़ियां उगी हुईं हैं, ऐसे में खिलाड़ियों को सड़कों पर दौड़ना पड़ रहा है।
मैगलगंज के खखरा गांव में 2007 में जिला योजना से मिनी स्टेडियम बनाने के लिए शिलान्यास किया गया था। लाखों रुपये खर्च कर स्टेडियम का निर्माण कराया गया, लेकिन 14 साल के अंदर ही मिनी स्टेडियम जर्जर हो गया। मैदान में झाड़ियां उगी हैं। खेल के कई उपकरण गायब हो चुके हैं। जिम्मेदार कर्मचारी भी यहां तैनात नहीं है। इससे यह खेल मैदान लोगों के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
इधर, पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान (पाइका) से 2008-09 में 97 और 2009-10 में 100 ग्राम पंचायतों में कुल 197 खेल मैदान विकसित किए गए थे, जिस पर करीब 197 लाख रुपये खर्च किए गए। ग्रामीणों को खेलकूद का अभ्यास कराने के लिए क्रीड़ा श्री पदनाम से प्रशिक्षकों की भी नियुक्ति की गई। कुछ सालों में ही यह योजना दम तोड़ गई। हालात यह है कि लाखों रुपये से खरीदा गया सामान गायब हो चुका है। खेल मैदान भी ढूंढने से नहीं मिल रहे हैं। इस योजना में भ्रष्टाचार के आरोप भी लग चुके हैं।
इसी तरह खेलो इंडिया कार्यक्रम की घोषणा 2017 में हुई थी, जिसके बाद 2018 से इसे योजना के तौर पर लागू किया गया। इससे केवल एथलीट को ही नहीं, बल्कि खेल का एक नया ढांचा बनाने की कवायद शुरू की गई। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को खेलों में अपना भविष्य बनाने के प्रति जागरूक और अवसर प्रदान करने के लिए सभी ब्लॉकों में स्टेडियम बनाए जाने थे। ब्लॉक मुख्यालय पर स्टेडियम का निर्माण कराने के लिए कम से कम पांच एकड़ जमीन की जरूरत थी। जिला युवा कल्याण विभाग ने सभी ब्लॉकों से जमीन उपलब्धता कराते हुए प्रस्ताव मांगे थे। निघासन ब्लॉक से करीब छह एकड़, पलिया, बेहजम और मितौली में छह से सात एकड़ तक जमीन युवा कल्याण विभाग के नाम हस्तांतरित करते हुए प्रस्ताव भेजे जा गए, लेकिन अब तक किसी स्टेडियम का निर्माण कराने के लिए बजट नहीं मिल सका। शेष 11 ब्लॉकों में जमीन की उपलब्धता नहीं होने से इनके प्रस्ताव ही नहीं भेजे जा सके हैं। अब नए प्रस्ताव भेजे नहीं जाएंगे, क्योंकि पिछले महीने जुलाई में सरकार ने खेलो इंडिया कार्यक्रम में नए प्रस्तावों को भेजने पर रोक लगा दी है।
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64 ग्राम पंचायतों के पास खेल मैदान की जगह
पाइका से 197 ग्राम पंचायतों में खेल मैदान विकसित किए गए थे, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 64 ग्राम पंचायतों के पास खेल मैदान की जमीन बची है। कुल 1165 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें खेल मैदान विकसित करने की कवायद शासन स्तर से फिर प्रारंभ हो गई है। शासन ने डीपीआरओ से ग्राम पंचायतों में खेल मैदान विकसित करने के लिए जमीन की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी है। डीपीआरओ सौम्य शील सिंह ने बताया कि 1165 के सापेक्ष 64 ग्राम पंचायतों के पास खेल मैदान की जमीन उपलब्ध होने की सूचना प्राप्त हुई है।
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चार ब्लॉकों में स्टेडियम बनाने के लिए जमीन मिली है, जिनके प्रस्ताव शासन को भेजे जा चुके हैं। अभी बजट न मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया है। पाइका योजना 2014 से बंद हो चुकी है।
-भगवान दास, जिला युवा कल्याण अधिकारी
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कस्बे में खेल मैदान न होने से युवाओं को अभ्यास करने का मौका ही नहीं मिलता। इसलिए बड़े शहरों की ओर भागना पड़ता है। जिनके पास संसाधन नहीं हैं, वे मायूस होते हैं। कानपुर में क्रिकेट का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा हूं।
-हैप्पी पन्नू, मैगलगंज
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खेल मैदान न होने से खेलने का मौका नहीं मिलता। गांव में खेल के लिए कहीं पर्याप्त जगह भी नहीं है और न ही खेल का सामान है। खखरा में बना मिनी स्टेडियम भी बंद रहता है। सरकार से मांग है कि मिनी स्टेडियम को जल्द चालू कराया जाए।
-विनीत कुमार, चपरतला