लखीमपुर खीरी। स्पॉन्सरशिप योजना बजट के अभाव में लटक गई है। बीते वर्ष मार्च से अब तक लाभार्थी बच्चों के खाते में धनराशि नहीं भेजी गई है। कई ऐसे बच्चे भी हैं, जिनका नाम तो लाभार्थी सूची में है लेकिन अब तक उनको लाभ नहीं मिला है।
स्पॉन्सरशिप योजना के तहत निराश्रित बच्चों को उनकी शिक्षा व पालन-पोषण के लिए बालिग होने तक चार हजार रुपये प्रतिमाह देने का नियम है। पहले चरण में जिले के करीब 95 बच्चों को इस योजना का लाभ दिया गया था। दूसरे चरण के 2024-25 वित्तीय वर्ष में 1001 बच्चों के खाते में रुपये भेजे गए थे। बीते वर्ष मार्च के बाद से अब तक करीब 10 माह हो गए हैं। धीरे-धीरे विभाग के पास करीब 2800 आवेदन हो गए लेकिन अब तक यह राशि उनके खाते में नहीं भेजी गई है। प्रति तीन माह में यह राशि बच्चों के खाते में जानी थी। प्रोबेशन विभाग के अफसर बजट न होने का रोना रो रहे हैं।
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इन बच्चों को मिलता है योजना का लाभ
-वे बच्चे, जिनके माता-पिता की मौत हो गई हो। मां तलाकशुदा या परिवार से अलग हो गई हो।
-जिनके माता-पिता या उनमें से कोई एक गंभीर अथवा जानलेवा बीमारी से ग्रसित हों।
-ऐसे बच्चे, जो बेघर हैं, निराश्रित हैं या विस्थापित परिवार के साथ रह रहे हैं।
-जो कानून से संघर्षरत हैं, जिन्हें बाल तस्करी, बाल विवाह, बाल श्रम, बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया हो।
-ऐसे बच्चे, जो किसी प्राकृतिक आपदा के शिकार हों, दिव्यांग, लापता या घर से भागे हुए हैं।
-जिनके माता-पिता या उनमें से एक कारागार में निरुद्ध हैं। एचआइवी से ग्रसित बच्चे।
-जिन बच्चों के माता-पिता आर्थिक, शारीरिक या मानसिक रूप से देखभाल में असमर्थ हों।
-वे बच्चे, जिनको सहायता एवं पुनर्वास की आवश्यकता हो।
-जो बच्चे फुटपाथ पर जीवनयापन कर रहे, प्रताड़ित, उत्पीड़ित या शोषित हों।
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बजट न मिलने की वजह से खाते में धनराशि नहीं भेजी जा सकी है। बजट आते ही लाभार्थियों के खाते में सहायता राशि भेज दी जाएगी।
लवकुश भार्गव, जिला प्रोबेशन अधिकारी