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विश्व नींद दिवस पर विशेषः सेहतमंद रहने के लिए आठ घंटे नींद जरूरी

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लखीमपुर खीरी। बदलती जीवन शैली एवं इंटरनेट का बढ़ता चलन हर किसी को नींद की कमी का रोगी बना रहा है। मोबाइल एवं कंप्यूटर आंखों पर दुष्प्रभाव डालने के साथ नींद में भी खलल डाल रहे है, जिसका असर लोगों की सेहत पड़ रहा है और युवा वर्ग तमाम बीमारियों की चपेट में आ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि स्वस्थ जीवन बिताने के लिए रोजाना आठ घंटे की नींद जरूरी है।
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नींद की महत्ता के लिए ही हर साल विश्व निद्रा दिवस यानी वर्ल्ड स्लीप डे मनाया जाता है। डॉक्टर बताते हैं कि अनियमित जीवन शैली, शारीरिक श्रम की कमी, पर्यावरण एवं सोने का स्थान भी नींद प्रभावित करता है। कुछ सावधानियां अपनाकर एवं जीवन शैली को नियमित करने से बेहतर नींद लेकर जिंदगी को स्वस्थ एवं खुशहाल बनाया जा सकता है।
रोजाना जिला अस्पताल आ रहे 30 से 40 मरीज
मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि बच्चा हो या बूढ़ा, आज के दौर में हर कोई नींद की बीमारी से पीड़ित है। ओपीडी में रोजाना 30 से 40 मरीज अनिद्रा के आ रहे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा संख्या युवाओं की है। कोई काम के तनाव में पर्याप्त नींद नहीं ले पा रहा, तो कोई मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग करने से।
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प्रजनन पर भी असर कर रही अनिद्रा
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक बताते हैं कि नींद का पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर भी प्रभाव पड़ता है। टेस्टोस्टेरॉन पुरुष हार्मोन है, जो प्रजनन के लिए महत्वपूर्ण है। पुरुषों में हर दिन जितनी मात्रा में टेस्टोस्टेरॉन रिलीज होता है, उसकी अधिक मात्रा नींद में ही रिलीज होती है। नींद पूरी न होने के कारण यह मात्रा भी कम हो रही है, जिसका सीधा असर प्रजनन पर पड़ रहा है
ऐसे लें सुकून भरी नींद
बेहतर नींद के लिए खाना खाने के तुरंत बाद सोने न जाएं, बल्कि कुछ देर तक टहलें। संतुलित एवं स्वस्थ आहार लें। बिस्तर पर जाने से पहले शराब, सिगरेट, काफी, चाय, कोल्ड ड्रिंक न लें। सोने वाला कमरा साफ, शांत, अंधेरा एवं एलर्जी व गंध मुक्त हो। बिस्तर पतला हो। टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल का प्रयोग सीमित रखें। दिन में न सोएं, बिना कारण बिस्तर पर न लेटे रहें।
नींद के अभाव में होने वाली बीमारियां
सिर दर्द, पेट संबंधी गड़बड़ी, गैस, मोटापा, तनाव, डायबिटीज, हृदय रोग, थकावट, कमजोरी, काम में मन न लगना, हार्मोनल परिवर्तन, एकाग्रता एवं स्फूर्ति में कमी, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा, प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होना, भावनाओं का असामान्य होना, मेटाबोलिज्म प्रभावित होना, मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होना, दुर्घटना एवं मृत्यु दर अधिक होने का कारण।
शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। सोने का समय निश्चित करें। शाम के समय व्यायाम न करें। इंटरनेट का कम से कम प्रयोग करें। यदि इसके बाद भी नींद नहीं आ रही है तो डॉक्टर को दिखाएं।
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- डॉ. अखिलेश शुक्ला, मनोरोग विशेषज्ञ जिला अस्पताल
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