सुहेला हनुमान मंदिर हुए कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करतीं कवयित्री शिप्रा खरे। स्रोत : आयोजक
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गोला गोकर्णनाथ। ग्राम सुहेला स्थित श्री हनुमान मंदिर का सप्तम वार्षिकोत्सव विराट कवि सम्मेलन के साथ संपन्न हो गया। सम्मेलन में किसी कवि ने पिता की बेबसी और मुफलिसी का दर्द बयां किया तो किसी ने व्यवस्था पर तीखे व्यंग्य किए। गीत, गजल, हास्य और श्रृंगार रस की रचनाओं से सजी महफिल रात दो बजे तक चलती रही।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ बाराबंकी से आए कवि शिवकिशोर तिवारी खंजन ने वाणी वंदना से किया। इसके बाद शाहजहांपुर से आए कवि हिमांशु मोहन शुक्ल ने जीवन के संघर्ष को पंक्तियों में पिरोते हुए कहा- बुला रही है जीवन की मझधार बटोही। अभी प्रेम का समय नहीं है यार बटोही।
सीतापुर के वरिष्ठ व्यंग्यकार केदारनाथ शुक्ल ने व्यवस्था पर कटाक्ष करते हुए कहा- है रुग्ण व्यवस्था पर न कहीं उपचार दिखाई देता है। यह संविधान ही अब हमको बीमार दिखाई देता है।
लखनऊ से आए गजलकार दीपक सार्थक ने रिश्तों की खटास को इन पंक्तियों में बयां किया- बिगड़ी हुई बातों को बनायेंगे कहां तक। हर बात पे रूठे हो मनाएंगे कहां तक। वहीं, शिवकिशोर तिवारी खंजन ने मुफलिसी और पिता की संवेदनाओं को उकेरते हुए सुनाया- किसी की मुफ़लिसी का ज्वार कभी तुम नाप कर देखो। इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने आर्थिक तंगी से जूझते परिवार और पिता की मनोदशा को सामने रखा।
सिधौली से आए हास्य कवि लवकुश शुक्ल ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर तक हंसाया। लखनऊ की ख्यातिप्राप्त कवयित्री सुफलता त्रिपाठी ने गीतों और लोकगीतों से समां बांध दिया। शृंगार रस के वरिष्ठ गीतकार राजेंद्र प्रसाद तिवारी कंटक ने अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसके अतिरिक्त अभिषेक पांडे, शिप्रा खरे और वेद प्रकाश अग्निहोत्री ने भी काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कवि डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर (सूरत) ने की। मुख्य अतिथि विजय शुक्ल रिंकू रहे। संचालन लवकुश शुक्ल ने किया। अंत में संयोजक डॉ. वेद प्रकाश अग्निहोत्री ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।