डीपीआरओ ने शासन को डीपीआर भेजकर पांच करोड़ मांगे
लखीमपुर खीरी। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के फेज टू में चलाए जा रहे कार्यक्रम के तहत 250 राजस्व ग्रामों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इन गांवों में प्लांट स्थापित करने के लिए शासन से पांच करोड़ रुपये बजट की डिमांड की गई है।
फेज टू में गांवों में ओडीएफ की स्थिति को बनाए रखना प्राथमिकता है, तो वहीं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, तरल अपशिष्ट प्रबंधन किया जाना है, जिसके लिए गांवों में संयंत्र स्थापित किए जाने हैं। गांव में ठोस कचरे का प्रबंधन करने के लिए कंपोस्ट पिट का निर्माण किया जाना है। ताकि अपशिष्ट की छटाई जैविक व अजैविक या उसके उप भाग के वर्गों में पृथक करके प्रबंधन किया जा सके।
बताते चलें कि लैंडफिल या डंपिंग ग्राउंड विभिन्न एक्ट व नियमों के माध्यम से अब पूर्णता प्रतिबंधित है और यह एक दंडनीय अपराध भी है। ऐसे ही तरल अपशिष्ट का प्रबंधन करने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की जानी है। इसके अलावा प्लास्टिक का कचरा भी गांवों में खूब निकल रहा है, जिसके प्रबंधन के लिए जल्द ही ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। हालांकि प्लास्टिक थैलियों के उपयोग को प्रतिबंधित किया जा चुका है, लेकिन शहरों से लेकर गांवों तक में प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग बदस्तूर जारी है।
अब तक गांवों में कचरा प्रबंधन के लिए कोई प्लांट स्थापित नहीं है, जबकि सरकार ने 2024 कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। दो साल का समय शेष है। ऐसे में विभाग ने राजस्व गांवों बेहजम, लखीमपुर ब्लॉक के राजापुर, कुंभी के लाल्हापुर, फूलबेहड़ के भेड़ौरा समेत 250 राजस्व गांवों का प्रस्ताव भेजा गया है।
ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई
संग्रहण व एकत्रीकरण केंद्रों से प्लास्टिक अपशिष्ट को ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र पर भेजा जाएगा। इसके लिए ब्लॉक स्तर पर प्रबंधन केंद्र स्थापित किए जाने हैं। डीपीआरओ ने बताया कि इस इकाई के निर्माण पर करीब 16 लाख रुपये व्यय आएगा। ऐसे केंद्रों में एकत्रित प्लास्टिक अपशिष्ट की मात्रा को घटाने के लिए एक कटाई और बेलिंग मशीन होगी। पुन:चक्रित कटे हुए छोटे टुकड़ों व बेल्ड प्लास्टिक कचरे का सड़क निर्माण में उपयोग किया जा सकता है।
एसबीएम के फेज टू कार्यक्रम के तहत राजस्व गांवों में ठोस व तरल अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयां स्थापित की जानी हैं। इसके लिए 250 राजस्व गांवों का चयन कर प्रस्ताव शासन को भेजा है। इनकी स्थापना के लिए पांच करोड़ की डिमांड की गई है।
- सौम्य शील सिंह, डीपीआरओ