लखीमपुर खीरी। भारत की खाद से नेपाल के खेतों की फसलें लहलहाती हैं, इसकी पुष्टि शुक्रवार को सीमा पर पकड़ी गई खाद से हो गई है। यही वजह है कि जिले में पर्याप्त खाद आने के बाद भी संकट बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक खाद तस्करी के खेल में सीमा के विक्रेताओं का भी कहीं न कहीं हाथ होता है। उनके यहां खाद डंप की जाती है और बाद में धीरे-धीरे बाइक-साइकिल से दो-दो बोरी खाद नेपाल भेजी जाती है। पिछले दिनों जिले में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही आए थे, जिन्होंने तस्करी का संदेह जताते हुए सीमा की दुकानों की जांच कराने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए थे।
जिले में कृषि का रकबा करीब छह लाख हेक्टेयर का है। खरीफ सीजन में प्रमुख रूप से गन्ना, धान, केला, उर्द आदि की फसलें हैं। गन्ने का करबा 3.65 लाख हेक्टयर, धान का 1.10 लाख, केला का 3115 हेक्टेयर है। खरीफ सीजन में फसलों के अनुसार यूरिया की जरूरत 1.46 लाख मीट्रिक टन है, जिसके सापेक्ष अब तक 1.15 लाख मीट्रिक टन का वितरण हो चुका है। करीब 4850 एमटी स्टॉक में है। अभी भी करीब 30 हजार एमटी जरूरत है। वैसे तो जिले में पर्याप्त खाद आ चुकी है, लेकिन पिछले एक माह से खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है।
पर्याप्त खाद आने के बाद के बाद संकट के पीछे कहीं न कहीं तस्करी का संदेह है, जिसकी पुष्टि तिकुनिया क्षेत्र में पकड़ी गई खाद से हो गई। वैसे तो नेपाल सीमा के चेक पोस्ट पर एसएसबी की गहन चेकिंग होती है। पूरे सीमा क्षेत्र में गश्त भी होती, लेकिन मौका पाकर तस्कर अन्य रास्तों से चोरी-छिपे खाद तस्करी करते हैं।
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तीन साल पहले भी तस्करी में पकड़ी गई थी खाद
-तिकोनिया नेपाल सीमा के पिलर संख्या 703 और 704 पर एसएसबी ने तीन साल पहले नेपाल जा रही खाद को पकड़ा था। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पिछले साल धौरहरा के सीमावर्ती बहराइच की कोतवाली मोतीपुर पुलिस ने सर्राकलां और बलई गांव होकर नेपाल ले जाई जा रही डीएपी पकड़ी थी। पिछले साल जनपद श्रावस्ती में नेपाल सीमा पर बड़ी मात्रा में वहां के डीएम और एसपी ने खाद पकड़ी थी।
वर्जन
सीतापुर की खाद थी, जो नेपाल जा रही थी। यही सीमा पर पकड़ी गई है। मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया है। भारत नेपाल सीमा पर लगातार एसएसबी की ओर से खाद तस्करी रोकने के लिए चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।
-दुर्गा शक्ति नागपाल, डीएम