मनोवांछित फल देती है चैत्र कृष्ण चतुर्दशी की पूजा
माहात्म्य के कारण लगता है चैती मेला
चैत्र की कृष्ण चतुर्दशी शिव, वाराह, पद्म, कूर्म पुराण में वर्णित उत्तर गोकर्ण छोटी काशी में शिव जी के प्राकट्य और मृगरूप धारी शिव श्रंग के स्थापना की तिथि है। इस दिन की पूजा श्रद्धालुओं को मनोवांछित फल प्रदान करती है। इस माहात्म्य के कारण प्राचीन काल से यहां चैती का मेला लगता है।
पद्म पुराण में वर्णन है कि प्राचीन काल में कोटद्वार नगर अब कोटवारा ग्राम में गरीब ब्राह्मण सदानंद की प्रिय गाय को उसकी पत्नी ने मारकर खा लिया था। इस पाप कर्म से उसका एक मात्र पुत्र धर्म गूंगा हो गया। सदानंद ने प्रायश्चित के उद्देश्य से वन गमन किया। रात होने पर हिंसक पशुओं के भय से वह बेल वृक्ष पर जाकर बैठ गया। रात्रि जागरण के उद्देश्य से एक-एक बेलपत्र नीचे डालने लगा, साथ में ऊँ नम: शिवाय का जप करने लगा। जिस डाल पर सदानंद बैठा था उसके नीचे भगवान विष्णु की ओर से स्थापित मृगरूपधारी शिव श्रंग था। बेलपत्र गिरने और पंचाक्षर मंत्र के जप से शिव ने सदानंद के संमुख प्रकट होकर वरदान मांगने को कहा। तो सदानंद ने गाय का पुनर्जीवन और पुत्र का गूंगापन दूर करने का वरदान मांगकर पाप निवारण का उपाय पूछा। भगवान शिव ने उसे पंच तीर्थों की स्थापना करने को कहा। ब्राह्मण सदानंद शिव के अनुसार गोकर्णनाथ शिवालय के समीप गोकर्ण तीर्थ, ग्राम भवानीगंज में कोणार्क तीर्थ, पुुनर्भ्रूग्रंट में भद्र तीर्थ, अहमदनगर ग्राम में मांड तीर्थ की स्थापना की। पंचतीर्थों में स्नान कर सदानंद ने गोकर्णनाथ शिव के दर्शन कर बेलपत्र अर्पित किए तो सदानंद की पत्नी के पापों का निवारण हो गया। शिव ने उसे वरदान दिया कि चैत्र की कृष्ण चतुर्दशी को मीन राशि में सूर्य के होने पर जो भक्त मुंडन करवाकर पंच तीर्थों में स्नान कर मेरे श्रंग का दर्शन कर बेलपत्र अर्पण कर रात्रि जागरण करेगा उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।
पद्म पुराण में लिखा गया है कि जो भक्त चैत्र की कृष्ण चतुर्दशी को छोटी काशी में शिवजी की पूजा करता है वह 100 जन्मों के पापों से मुक्त होकर जन्म मृत्यु से रहित हो जाता है। इस पुराण में उत्तर गोकर्ण को सात द्वीप और तीनों लोकों से श्रेष्ठ कहा गया है। भगवान शिव के वरदान से फल प्राप्ति के लिए पंचकोषीय परिक्रमा प्रारंभ हुई और मेला लगने लगा लेकिन अब पंच तीर्थों से कई के दूषित होने से परिक्रमा समाप्त हो चुकी है।
बुधवार को है चतुर्दशी
गोकर्णनाथ चंद्रभाल शिव मंदिर के पुजारी पं. दिनेश मिश्र ने बताया कि सूर्य इस समय मीन राशि में हैं। चतुर्दशी मंगलवार चार अप्रैल की रात साढ़े नौ बजे शुरू होकर बुधवार पांच अप्रैल की रात 7.15 बजे तक रहेगी। उदया तिथि बुधवार पांच अप्रैल होने के कारण बुधवार ही मुंडन, तीर्थ स्नान और शिव पूजन के लिए श्रेष्ठ है।