निघासन। शारदा नदी ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। बृहस्पतिवार को ग्रंट नंबर 12 गांव में 10 और मकान पलक झपकते ही नदी की धारा में समा गए। शारदा के कटान में अब तक गांव के 91 से ज्यादा आशियाने समा चुके हैं। शारदा नदी में अब तक तीन इंटरलॉक सड़कें और दो प्राचीन मंदिर भी समा चुके हैं।
गांव के प्रेमचंद, हरीराम, संजय कुमार, लीला देवी, गोल्डी देवी, काजल, कृपाराम, शैलेंद्र, रामलखन और पंचम के मकान बृहस्पतिवार को नदी की तेज धार में समा गए। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ग्रामीण अब आवासीय जमीन और सुरक्षित जगह तलाशने पर विवश हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन कई बार आश्वासन दे चुका है कि जलस्तर घटने पर बचाव कार्य शुरू होंगे। अब जबकि नदी का जलस्तर नीचे आ चुका है, फिर भी राहत कार्य शुरू नहीं हो सके हैं। बचाव कार्य की जगह शारदा नदी बने बनाए आशियाने उजाड़ रही है। गांव का वजूद मिटने की प्रबल आशंका बनी हुई है।
उधर, शारदा की आगोश में आए आशियाने से विमुख होकर सड़कों पर रातें गुजार रहे कटान पीड़ितों ने सड़कों पर तिरपाल डालकर शरण ले रखी है। नन्हे नन्हे बच्चों के शायद संक्रमण से फैल रही बीमारियों से जूझ रहे ग्रामीण एक दूसरे की मदद से जीने की आस लगाए है।
सड़कों पर तिरपाल डालकर गुजारनी पड़ रहीं रातें
गांव का बड़ा हिस्सा उजड़ जाने के बाद कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे जीवन काटने को मजबूर हैं। सड़क किनारे तिरपाल डालकर परिवार रह रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे संक्रमणजनित बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बिजली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। कटान में खंभे बह जाने से अंधेरे में रहना पड़ रहा है।
साहब .. अंधेरे में जंगली जानवरों का भय रात भर सोने नहीं देता
सड़कों पर लावारिस हालत में पड़े ग्रामीणों का दर्द जुबां से छलक ही पड़ता है। कटान की जद में आने से बिजली के कई खंभे नदी की धारा में समा चुके हैं। क्षेत्र की बिजली व्यवस्था ठप है, जिसके चलते कटान पीड़ित के अलावा जिनके घर शारदा के मुहाने पर है वह सड़क के किनारे गुजर बसर कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जो भविष्य में नहीं सोचा था, वैसी जिंदगी जीने को विवश हैं। ग्रामीणों को डर है कि आने वाले दिनों में पूरा गांव नक्शे से मिट सकता है।
सिंघिया फार्म में अब तक 21 मकान और 55 एकड़ जमीन नदी में समाई
बिजुआ। क्षेत्र में शारदा नदी का रौद्र रूप लगातार जारी है। 18वें दिन भी क्षेत्र के गांव सिंधिया फार्म में नदी का कटान जारी रहने से लोग अपने घर तोड़ने को मजबूर हैं। अब तक यहां 21 मकान और लगभग 55 एकड़ फसल युक्त कृषि भूमि शारदा नदी में समा चुकी है। तराई क्षेत्र में शारदा नदी का विकराल रूप इस समय सबसे बड़ा संकट बन गया है। बाढ़ का पानी भले ही कम हो गया हो, लेकिन नदी कटान किसानों और ग्रामीणों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाल रहा है।
बिजुआ ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत जौहरा गुजारा के मजरा गांव सिंधिया फार्म में इन दिनों कटान तेजी से हो रहा है। बीते 18 दिनों में किसानों की लगभग 55 एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि शारदा में समाहित हो चुकी है। खेतों में लगी गन्ने और धान की फसल नदी की धारा में बह गई है, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
जलस्तर बढ़ने के साथ ही शारदा नदी की धारा गांव की ओर बढ़ती चली गई, बीते पंद्रह दिनों में सत्यपाल, राजकुमार, दुर्गा प्रसाद, हरिकिशुन, राजाराम और आरती सहित कई लोगों के पक्के मकान नदी में समाहित हो चुके हैं। कई अन्य ग्रामीणों के मकान भी कटने की कगार पर हैं। पीड़ित ग्रामीण ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा अभी तक बाढ़ राहत किट तक वितरित नहीं की गई है और न ही बाढ़ से हो रहे कटान को रोकने का कोई प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अब कुछ ही घर शेष बचे है, और यदि जलस्तर एक फिट भी बढ़ा तो कुछ ही घंटों में गांव का अस्तित्व पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। क्षेत्रीय लेखपाल राकेश कुमार शुक्ला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वे मौके पर पहुंचकर पूरी रिपोर्ट तहसील प्रशासन को निरंतर भेज रहे हैं। नदी अभी भी काफी तेजी से कटान कर रही है। संवाद
ग्रंट नंबर 12 गांव में नदी का विकराल रूप। संवाद