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डायरिया से 14 दिन में सात बच्चों की मौत, छह भर्ती      

Sun, 14 May 2017 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो       लखीमपुर खीरी।
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डायरिया - फोटो : अमर उजाला
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गर्मी बढ़ते ही बढ़ा डायरिया का प्रकोप      
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  गर्मी चरम पर है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम के मिजाज को देखते हुए जरा सी बरती गई लापरवाही बीमारी और मौत का कारण बन रही हैं। इससे सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी के कारण बच्चे डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। एक मई से अभी तक सात बच्चों की मौत डायरिया से हो चुकी है, जबकि कई बच्चे लखनऊ रेफर हो चुुके हैं। वहीं चिल्ड्रेन वार्ड में डायरिया पीड़ित बच्चों के भर्ती होने का सिलसिला भी जारी है।      
जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती हुए डायरिया पीड़ित गढ़ी मिदनिया निवासी प्रमोद के तीन माह के पुत्र अंकित, फूलबेहड़ के शीतलापुर निवासी मंजीत की दो साल की पुत्री रिमझिम, बेलहरी निवासी अंनतराम की आठ माह की पुत्री सविता, हाथीपुर निवासी सूरज की तीन माह की पुत्री देविका, ईसानगर निवासी संजय के 14 माह के  पुत्र सुनील, रामचोरपुर निवासी लवकुश के डेढ़ साल की पुत्री  पार्वती सहित रहमानपुर निवासी ओदश के डेढ़ साल के पुत्र पवन की मौत हो चुकी है।  जबकि कई बच्चों की हालत बिगडने पर उन्हें लखनऊ रेफर किया जा चुका है।      
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 छह बच्चों का चल रहा है इलाज      
जिला अस्पताल के चिल्ड्रन वार्ड में रामपुर निवासी मुस्तकीम के आठ माह के पुत्र ऐराज, खीरी निवासी मुकेश के डेढ़ साल के पुत्र तनु, मितौली निवासी नीरज के 14 माह के पुत्र एके राज, मझरा निवासी जवाहर के तीन माह के पुत्र अंकित, अटकोहना निवासी रमाकांत की तीन साल की पुत्री सविता और गौरिया निवासी अनिल तिवारी की पांच माह की पुत्री रितिक का इलाज चल रहा है।      
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ऐसे करें बचाव      
1. बच्चों को धूप में लेकर ना निकलें।      
2. बाहर की चीजें खाने को ना दें।      
3. घर में साफ सफाई रखें।      
4. यदि जरूरी हो तो बच्चे को ढक कर बाहर निकालें।      
5. फास्टफूड आदि से दूर रखें।      
6. ज्यादा से ज्यादा पानी एवं जूस का सेवन कराएं।      
   
जागरूकता से हो सकता है बचाव      
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.आरके वर्मा का कहना है कि बच्चों के मां बाप यदि जागरूक रहें तो बच्चों को बीमारियों से बचाया जा सकता है। उनका कहना है कि बच्चों को बाहरी चीजें ना खाने दें, घर में साफ सफाई रखें। बच्चों को खाने से पहले व शौच के बाद अच्छी तरह से हांथ धुलने की आदत डालें, उल्टी, दस्त व बुखार आने पर ना तो स्वयं दवा दें और न ही इधर उधर से लेकर दें। बच्चे को नजदीकी सरकारी एवं जिला अस्पताल लेकर लाएं। उल्टी दस्त आने पर बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाएं, जिससे उसमें पानी की कमी ना होने पाए। ओआरएस आंगनबाड़ी, आशा एवं एएनएम से ले सकते हैं।       
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