लखीमपुर खीरी। बरात वाली बस के विद्युत लाइन की चपेट में आने से किशोरी की मौत के मामले में आरटीआई से खुलासा हुआ है कि हादसे के दौरान विद्युत लाइन हैंडओवर नहीं हुई थी। इसके बावजूद आपूर्ति चालू कर दी गई।
हादसे की जांच गोला सर्किल के अधीक्षण अभियंता मनीष कुमार झा को सौंपी गई थी, लेकिन तीन माह बाद भी पूरी नहीं हो सकी। जून, 2026 में पीलीभीत से खीरी टाउन पहुंची बरात की बस विद्युत लाइन की चपेट में आ गई थी। हादसे में किशोरी की मौके पर मौत हो गई।
33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र खीरी टाउन से निर्गत 11 केवी पोषक खीरी टाउन के बाइफरकेशन का काम मैसर्स काकुल ट्रेडर्स के प्रोपराइटर फराज खान को आवंटित था।
घटना के बाद विभागीय अफसरों ने काम पूरा होने की बात कही थी। वहीं, विभागीय सूत्रों ने काम अधूरा होने की बात कही। सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में 77 खंभों का काम पूरा हो चुका था। दूसरे चरण में 22 खंभों का काम चल रहा था। इसी दौरान हादसा हुआ।
घटना के बाद जेई विमल कुमार रावत ने खीरी थाने में तहरीर दी थी। इसमें कहा था कि घटना से दो दिन पहले संबंधित लोगों ने उनकी अनुमति के बिना नवनिर्मित 11 केवी लाइन को इंडस्ट्रियल पोषक से जोड़ दिया था। इससे हादसा हुआ। जेई की तहरीर पर कार्रवाई तो दूर, जांच तक नहीं की गई। उल्टा एफआईआर के साथ उन्हें निलंबित कर दिया गया। जेई अब तक बहाल नहीं हो सके हैं।
प्रोपराइटर फराज ने कहा कि घटना से पहले काम पूरा होने के साथ लाइन हैंडओवर कर दी गई थी। हालांकि, आरटीआई के खुलासे में लाइन हैंडओवर नहीं होने की बात सामने आई है।
अधीक्षण अभियंता बोले- जांच अभी चल रही
घटना की जांच गोला सर्किल के अधीक्षण अभियंता मनीष कुमार झा को सौंपी गई थी। तीन माह बाद भी जांच पूरी नहीं हुई। अधीक्षण अभियंता ने बताया कि जांच चल रही है। कुछ लोगों के बयान नहीं मिल पाने से देरी हुई है। जल्द जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।