आम लोगों में गरीबों के हमदर्द की है पहचान
बसपा से निकाले जाने से अन्य दलों के दावेदारों में बेचैनी
विधायक रोमी साहनी को पार्टी से निकाले जाने से जिले में अटकलों का दौर शुरू हो गया है। बसपा से निकाले जाने के बाद रोमी के अन्य दल में जाने की संभावना बढ़ गई हैै। इससे दूसरे दलों के दावेदारों में हलचल बढ़ गई है। हरविंदर साहनी उर्फ रोमी साहनी पार्टी बसपा से विधानसभा चुनाव जीते थे लेकिन जीतने के बाद उन्होंने अलग हटकर नई मिसाल पेश की। वह लोगों के घर सुख-दुख पता चलने पर न सिर्फ पहुंचते थे बल्कि परिवार को हरसंभव आर्थिक मदद भी देते हैं। इसके अलावा पलिया विधानसभा क्षेत्र में आजादी के बाद से अभी तक बिजली के लिए तरस रहे करीब 40 उन गांवों में विद्युतीकरण कराने का भी श्रेय है। लोगों का मानना है कि चुनाव के पहले बसपा का अचानक उठाया गया कदम उस पर भारी पड़ सकता है वहीं पार्टी का कहना है कि किसी के बाहर निकाले जाने से पार्टी की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
वर्ष 2012 में जब हरविंदर कुमार उर्फ रोमी साहनी ने बसपा के सिंबल से नवसृजित पलिया विधानसभा से चुनाव लड़ा था, तो उनके बारे में बहुत कम लोग ही वाकिफ थे। उनका कोई राजनीतिक इतिहास भी नहीं था। 2012 में वह पहली बार विधायक बने थे। साथ ही पलिया के पहले विधायक थे। चुनाव जीतने के बाद वह आए दिन जनता से मिलने लगे और सबसे पहली अपनी निधि से उन 40 गांवों को बिजली मुहैया कराई जो आजादी के बाद से बिजली से वंचित थे। इसके अलावा हादसों का शिकार हुए लोगों के घर पहुंचकर आर्थिक मदद देना शुरू की। ऐसे कामों से उन्होंने लोगों के दिलों में अपनी जगह बना ली। वर्ष 2017 के चुनाव के लिए भी उनको काफी मजबूत दावेदार माना जा रहा था लेकिन चुुनाव कार्यक्रम की घोषणा से पूर्व ही उनको बसपा से निष्कासित कर दिया गया।
बीजेपी में जाने की ज्यादा लग रहीं अटकलें
बसपा से निष्कासित किए गए विधायक रोमी साहनी के बीजेपी में जाने की ज्यादा अटकलें लगाई जा रहीं हैं। हालांकि इस पर रोमी की ओर से अभी कोई रुख स्पष्ट नहीं हो सका है। उनके बीजेपी में जाने की ज्यादा अटकलें इस वजह से हैं कि राज्यसभा सांसद और बसपा के कद्दावर नेता रहे जुगुल किशोर अब बीजेपी का दामन थाम चुके हैं। रोमी को बसपा से पलिया विधानसभा का टिकट दिलाने में उन्हीं का योगदान माना जाता है। हालांकि रोमी इस बदलाव के बाद भी बसपा से ही जुड़े रहे।
पार्टी पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पार्टी की अपनी पहचान है। इसमें विधायक या किसी पदाधिकारी के रहने या न रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। जो अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होगा, उसे बाहर जाना होगा। रोमी साहनी और राजेश वाल्मीकि को इसी के चलते पार्टी से निकाला गया है।
- अजय चौधरी, जिलाध्यक्ष बसपा