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लखीमपुर के बाद गोला डिपो की 26 अनुबंधित बसें सरेंडर

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लखीमपुर खीरी। कोरोना का ग्रहण परिवहन निगम पर ऐसा लगा कि बस संचालन के एक माह बाद भी रोडवेज की बसों को सवारियां नहीं मिल रहीं। ऐसे में आय कम आने पर निगम की ओर से होने वाली कटौती, रोड एवं यात्रीकर से छुटकारा पाने के लिए अनुबंधित बसों के मालिक उन्हें सरेंडर करने लगे हैं। लखीमपुर की अनुबंधित 13 बसों केे बाद गोला डिपो की 26 अनुबंधित बस मालिकों ने अपने वाहन एआरटीओ को सुपुर्द कर दिए।
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भूल जाएं एसी बसों से दिल्ली का आरामदायक सफर
लखीमपुर से दिल्ली के बीच चल रहीं पांच वातानुकूलित बस में से दो का संचालन जहां बंद हो गया है तो वहीं दो के मालिकों ने अपनी बसें एआरटीओ को सरेंडर कर दीं। जिन बसों का संचालन बंद हुआ उसमें एक स्कैनिया और एक साधारण वातानुकूलित बस है। यह दोनों बसें कौशांबी डिपो की हैं। वहीं जो बसें सरेंडर हुई वह दोनो लखीमपुर डिपो की हैं।
संचालन बंद होने से लेकर सरेंडर होने के पीछे का कारण सवारियां न मिलना है। जिस कारण निर्धारित से कम आय आने पर निगम कटौती करता है। जबकि बस पर आने वाला खर्च कोरोना काल से पहले वाला ही है। बस मालिक बताते हैं कि ऑन लाइन और ऑफ लाइन बुकिंग से दोनो तरफ की आय बमुश्किल 26-27 हजार होती है। आने जाने में करीब 205 लीटर डीजल, दो चालकों का खर्च, रोड एवं यात्री कर सहित एक महीने का करीब 4000 टोल टैक्स तो देना ही है। अन्य खर्चे अलग। ऐसे में बस संचालन घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसलिए सरेंडर करना मजबूरी है। जो बसें निरस्त हुईं हैं उनमें रात आठ बजे लखीमपुर से दिल्ली जाने वाली लखीमपुर डिपो की एसी बस, रात 08:30 बजे लखीमपुर से दिल्ली जाने वाली कौशांबी डिपो की एसी बस, रात 08:45 पर लखीमपुर से दिल्ली जाने वाली साहिबाबाद डिपो की स्कैनिया बस भी शामिल हैं।
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बसों की स्थिति
लखीमपुर डिपो में 76 साधारण बसें और चार एसी चार थीं, लेकिन सरेंडर होने के बाद 65 साधारण बसें और दो एसी रह गईं हैं।
यात्री न मिलने के कारण डिपो की दो एसी बसें सरेंडर होने के साथ अन्य डिपो की एसी बसें भी आना बंद हो र्गइं है। अब सिर्फ एक ही एसी बस दिल्ली जा रही है।
-एसपी सिंह, एआरएम
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