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पेयजल लाइन के लिए सड़कें खोदकर छोड़ीं, बारिश में बन जाएंगी जानलेवा

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राहगीरों के लिए मुसीबत बनी पाइप लाइन डालने को खोदी गई सड़क। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जलनिगम पेयजल सप्लाई के लिए शहर में पाइप लाइन डलवा रहा है, जिसके लिए खीरी रोड खोदी जा रही है। एक तो काम की धीमी गति दूसरे लापरवाही पूर्वक होने वाली खुदाई राहगीरों और दुकानदारों के लिए मुसीबत बन गई है। खोदकर डाली गई सड़क से उड़ने वाली मिट्टी लोगों को सांस का रोगी बनाने के साथ दुर्घटना का कारण बन रही है। वहीं बारिश होने पर इन गड्ढों के धसकने से हादसा भी हो सकता है।
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अमृत मिशन योजना के तहत नगर में रहने वाले सभी लोगों को स्वच्छ पेयजल मिल सके, इसलिए शहर में पाइप लाइन डालने का काम कार्यदायी संस्था जलनिगम करा रहा है। इसके लिए डीसी रोड से सौजन्या चौक से गुरुगोविंद सिंह तिराहा होते हुए हीरालाल धर्मशाला तक पाइप लाइन डाली जानी है। इसके लिए सड़क को खोदा जाएगा। फिलहाल सौजन्या चौक से विकास भवन के बीच तक पाइप लाइन डाली जा चुकी है। पाइप लाइन डालने के दौरान हो रही नियमों की अनदेखी शहरवासियों के लिए मुसीबत बनी है। कार्यदायी संस्था जलनिगम रोड खुदवाकर पाइप लाइन डालकर खोद कर निकाली गई मिट्टी से पाट दे रहा है। हवा चलने एवं वाहन निकलने पर यह मिट्टी उड़कर राहगीरों और आसपास के दुकानदारों के लिए परेशानी का कारण बन रही है, अभी तो गनीमत है, लेकिन मानसून आने पर शहरवासियों की मुसीबत और बढ़ेगी। पाइप लाइन डालने के बाद कार्यदायी संस्था रोड को कामचलाऊ पटवा दे रही है, लेकिन बारिश में मिट्टी बैठेगी, जिससे इस पर निकलने वाले वाहन आए दिन धंसकर जाम का कारण बनेंगे और हादसों की संख्या भी बढ़ेगी।
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बजरी, मौरंग बना रहीं सांस का रोगी
बीएसए कार्यालय के सामने एक व्यापारी ने फुटपाथ पर बजरी और मौरंग लगवाई है। जो हवा में उड़कर आसपास के दुकानदारों एवं राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। मौरंग आदि के कण हवा में उड़कर लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। मौरंग और बजरी फुटपाथ एवं रोड को क्षतिग्रस्त करने का कारण बन रही हैं। इस ओर न तो पालिका प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही जिले के जिम्मेदार।
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योजना- अमृत मिशन
अनुमानित लागत- 50 करोड़
कार्यदायी संस्था- जलनिगम
शहर में अनुमानित आवास- 30,000
पाइप लाइन डाली जाएगी- 90 किलोमीटर
ओवरहेड टैंक बनेंगे- तीन (सलेमपुर कोन, नौरंगाबाद एवं गुरुनानक इंटर कॉलेज)
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लोगों में गुस्सा
सड़क खोदकर डाल दी। अब यह कब तक बनेगी इसका कुछ पता नहीं। उड़ती धूल से दुकान पर बैठना मुश्किल है। धंधा भी प्रभावित हो रहा है।
-इरफान, दूध विक्रेता
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दुकान में मिट्टी की पर्त जमा हो जाती है। धूल उड़ने के कारण सांस लेना मुश्किल है। दिन भर दुकान में मुंह पर रुमाल बांधकर बैठना पड़ता है।
-ज्ञानेंद्र कटियार, हार्डवेयर व्यापारी
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पाइप लाइन के लिए सड़क खोदना मजबूरी है। मगर इस पर यदि पानी का छिड़काव कराते रहें तो धूल उड़ने की समस्या से निजात मिल जाएगी।
-अंकुर गोस्वामी, जनरल स्टोर
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वाहनों के निकलने पर सड़क की धूल उड़कर दुकान में आ रही है। पहले कोरोना की मार और अब सड़क का निर्माण होने से धंधा चौपट हो रहा है।
-अशोक कुमार, जलपान गृह
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धूल के कण सबसे ज्यादा फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। फेफड़ों में जमकर दमा घोंटू रोग का कारण बनते हैं। दमा सहित अन्य रोग भी धूल से होते हैं। इसलिए दो पहिया वाहन चालक हेलमेट पहने या मुुंह पर रुमाल बांध कर चलें।
-डॉ. आरके राम चंदानी, छाती रोग विशेषज्ञ
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अमृत मिशन योजना के तहत पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन डलवाने के लिए सड़क की खुदवाई की जा रही है। हीरालाला धर्मशाला के पास मेन पाइप लाइन से इसे जोड़ा जाएगा। इस बात का पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि इससे किसी को असुविधा न हो।
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-दिनेश कुमार गौतम, जेई जलनिगम
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