लखीमपुर खीरी। जनपद की सड़कों पर 13 ब्लैक स्पाट हैं, जिनके आसपास सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाएं होने की आशंका बनी रहती हैं। जरा सी चूक में जिंदगी से हाथ धोना पड़ सकता है। ऐसे ब्लैक स्पॉट दूर करने के प्रयास दशकों से चले आ रहे हैं, लेकिन अब तक इनका स्थायी समाधान नहीं हुआ हैै। सरकार ने इन ब्लैक स्पॉट के स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना मांगी है। इनका स्थायी समाधान होने पर कायाकल्प हो सकता है। वहीं सड़क हादसों में भी कमी आएगी।
पीडब्ल्यूडी के प्रांतीय खंड डिवीजन में दो ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं, जिसमें एक करनपुर मोड़ और दूसरा शहाबुद्दीनपुर मोड़ शामिल है। यहां पर आए-दिन दुर्घटनाएं होती हैं और जरा सी चूक होने पर वाहन चालक दुर्घटना का शिकार बन जाते हैं। यह दोनों मोड़ हाईवे 730 से जुड़ते हैं, यहां सीमा विवाद की स्थिति है। प्रांतीय खंड ने इन ब्लैक स्पॉट के स्थायी समाधान के लिए आगणन तैयार नहीं किया है, बल्कि अधिशासी अभियंता एनके यादव ने इन स्थानों पर एनएच डिवीजन द्वारा कार्य कराए जाने की बात कही हैै। निर्माण खंड तीन में सात ब्लैक स्पॉट, निर्माण खंड एक में तीन और निर्माण खंड एनएच में एक ब्लैक स्पॉट है। इन सभी ब्लैक स्पॉट पर सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं। अब तक इन स्थानों पर सजग करने के लिए अस्थायी उपाय के तौर पर रंबल स्ट्रिप और चेतावनी बोर्ड ही लगाए गए हैं, लेकिन इससे भी हादसों में कमी नहीं आई है।
पांच वर्षों के दौरान हुए हादसे
वर्ष हादसों की संख्या मृतक घायल
2015 387 291 158
2016 492 328 219
2017 517 364 242
2018 570 358 265
2019 612 347 291
डिवीजन में सात ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं, जिनके स्थायी समाधान के लिए कार्ययोजना बनाई जा रही है। जल्द ही शासन को भेज दी जाएगी।
योगेंद्र सिंह, अधिशासी अभियंता, निर्माण खंड तीन, पीडब्ल्यूडी
गड्ढों तलाशनी पड़ती है बांकेगंज-गोला सड़क
बांकेगंज। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत लोक निर्माण विभाग ने तीन साल पहले सड़क बनाई थी, जिसमें बांकेगंज, गोला और कुकरा मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे हैं। इस रोड पर आए दिन हादसे होने से कई लोगों की जानें जा चुकी हैं। हल्की सी बारिश होने पर गड्ढों में भरे पानी में गिरकर लोग घायल हो रहे हैं। सड़क बनने के बाद जिम्मेदारों ने इसकी मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया, जिससे 16 किलोमीटर लंबी सड़क जर्जर होकर पूरी तरह गड्ढों में तब्दील हो गई है। लोगों की शिकायत के बावजूद महकमे के जिम्मेदारों के कानों पर जूं नहीं रेंगती। इसको लेकर लोगों में नाराजगी है। संवाद
इस इलाके के कब सुधारे जाएंगे ब्लैक स्पॉट
आए दिन होती हैं दुर्घटनाएं, नहीं दिया जाता है ध्यान
पलियाकलां। प्रदेश में सड़कों पर 495 ब्लैक स्पॉट बताए गए हैं। जिसके सुधार के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग कार्ययोजना भी तैयार करा रहा है लेकिन पलिया इलाके के स्टेट हाईवे का हाल काफी बेहाल है। यहां पर भी लगभग सभी स्टेट हाईवे में कहीं न कहीं ब्लैक स्पॉट हैं। इसमें तीव्र मोड़ होने के साथ ही सांकेतिक बोर्ड भी नहीं लगे हैं। इसके अलावा जगह-जगह गड्ढों की भरमार है। ऐसे में दुर्घटनाएं होना आम बात हो गई है।
बता दें कि लोक निर्माण विभाग की तरफ से पूरे प्रदेश में सड़कों पर 495 ब्लैक स्पॉट चिह्नित हैं। जहां जरा सी असावधानी दुर्घटना का सबब बन सकती है। लेकिन पलिया इलाके की बात करें तो यहां अधिकतर सभी स्टेट हाईवे पर कहीं न कहीं ब्लैक स्पॉट मिल जाएगा। बात पलिया-भीरा रोड की करें तो बोझवा रपटा पुल के आगे तीव्र मोड़ है जिसमें बीते दिनों एक बस भी पलट गई थी। इसी तरह पलिया-संपूर्णानगर रोड पर त्रिकोलिया के पास तीव्र मोड़ है यहां पर कोई सांकेतिक बोर्ड भी नहीं लगा है। जिसके कारण यहां भी आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं। मझगईं की पलिया-निघासन रोड पर कस्बे से करीब दो किलोमीटर आगे तिकोना पुल ढाल से राजापुरवा गांव जाने वाले रास्ते तक दो खतरनाक तीव्र मोड़ हैं। कई दुर्घटनाओं के बाद पीडब्ल्यूडी विभाग ने एक आध स्थान पर सांकेतिक बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली। लेकिन अब तक मोड़ पर इधर-उधर सड़क किनारे झाड़ झंखाड़ साफ नहीं कराया गया है। न ही अब तक खतरनाक मोड़ पर स्पीड ब्रेकर ही बनाया जिससे हर समय तीव्र मोड़ पर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।