खीरी रोड पर लगी मिट्टी के बर्तनों की दुकान। संवाद
लखीमपुर खीरी। मिट्टी के तवा और कढ़ाई अब रसोई में फिर से अपनी जगह बनाने लगे हैं। बदलती जरूरतों के साथ कुम्हारों ने पारंपरिक बर्तनों को नया रूप दिया है। बाजार में मिट्टी के तवा, कढ़ाई, हांडी, फ्राइपैन और गिलास जैसे उत्पाद ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। इनकी बढ़ती मांग से मिट्टी के बर्तनों के कारोबार को सहारा मिल रहा है। खासकर खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की खरीदारी के लिए लोग दुकानों पर पहुंच रहे हैं।
शहर की खीरी रोड पर मिट्टी के बर्तनों की दुकान लगाने वाले इसराइल ने बताया कि ग्राहक अब केवल घड़े, सुराही और कुल्हड़ ही नहीं, बल्कि रसोई में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के बर्तन भी खरीदने आ रहे हैं। तवा, कढ़ाई और हांडी जैसे बर्तनों की मांग है। उनके मुताबिक मिट्टी के बर्तनों की खरीदारी करने वालों में ऐसे ग्राहक भी हैं, जो इनमें भोजन पकाना पसंद करते हैं।दुकान पर बर्तन खरीदने पहुंचीं महिला ग्राहक आरती शुक्ला और रेनू ने बताया कि मिट्टी के बर्तनों में बना भोजन अधिक स्वादिष्ट लगता है। इसी वजह से उन्होंने भी कढ़ाई और हांडी जैसे बर्तन खरीदे हैं। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की परंपरा अब नए रूप में फिर से पसंद की जा रही है।
पहले कुम्हारों का कारोबार मुख्य रूप से घड़े, सुराही, दीये और कुल्हड़ जैसे पारंपरिक उत्पादों पर निर्भर था। अब बाजार की मांग को देखते हुए वे आधुनिक रसोई में इस्तेमाल होने वाले बर्तन भी तैयार कर रहे हैं। इससे ग्राहकों को नए विकल्प मिल रहे हैं और मिट्टी के बर्तन बेचने वाले दुकानदारों को भी कारोबार बढ़ने की उम्मीद है।