जिला अस्पताल में गंभीर हालत देख डॉक्टरों ने खड़े किए हाथ
हंगामे की वजह से चार घंटे तक अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही प्रसूता
डॉक्टरों ने बताया कि पेट में मर चुका था बच्चा
जिला महिला अस्पताल में प्रसव के लिए आई महिला को डॉक्टर ने लखनऊ रेफर कर दिया, जिससे नाराज महिला के घरवालों ने डॉक्टरों पर न देखने का आरोप लगाया और हंगामा करने लगे। हालांकि, महिला का सुरक्षित प्रसव कराने के लिए डॉक्टरों ने दोबारा प्रयास किया, लेकिन सफलता न मिलने पर उसे लखनऊ भेजना ही उचित समझा।
खीरी कस्बे की कांशीराम कालोनी निवासी शौकत अली सोमवार को करीब आठ बजे अपनी गर्भवती पत्नी सलीमुन निशां को प्रसव के लिए जिला महिला अस्पताल लेकर आए। प्रसूता की हालत नाजुक होने और प्रसव की जटिलता को देखकर डॉ. यामिनी बादल ने प्रसूता को लखनऊ रेफर कर दिया। इस बात से नाराज होकर घरवालों ने डॉक्टर पर सलीमुन निशां को ना देखने का आरोप लगाकर हंगामा करने लगे, जिससे करीब चार घंटे तक प्रसूता गंभीर हालत में अस्पताल परिसर में ही तड़पती रही।
अधिकारियों द्वारा संज्ञान लिए जाने पर डॉक्टर एक बार फिर से प्रसूता को लेबर रूम ले गईं, लेकिन प्रसव न हो पाने पर डॉक्टरों ने सलीमुन निशां को 108 एम्बुलेंस से लखनऊ रेफर कर दिया। हंगामे की वजह से प्रसूता लगभग एक बजे जिला अस्पताल से लखनऊ के लिए रवाना हो सकी।
डॉ. यामिनी बादल ने बताया कि प्रसूता जब यहां लाई गई थी, तो उसकी हालत बहुत नाजुक थी और बच्चा भी मर चुका था। जिससे यहां पर प्रसव करा पाना संभव नहीं था, इसलिए तुरंत ही रेफर कर दिया गया, जिससे महिला की जान बच सके।
प्रसूता की हालत काफी नाजुक होने के साथ ही बच्चा भी उल्टा था और उसकी मौत हो चुकी थी, ऐसी स्थिति में आपरेेशन किया जाना भी संभव नहीं था, इसलिए रेफर किया गया। मेडिकल कालेज में सारी व्यवस्थाएं है ऐसी स्थिति में प्रसूता को वहीं भेजना उचित था, इसलिए उसे एम्बुलेंस से लखनऊ भेजवा दिया गया है।
डॉ. मीरा वर्मा, सीएमएस महिला अस्पताल