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Lakhimpur Kheri News: एप पर दर्ज करें सूचनाएं या दें शिक्षा, मुश्किल में शिक्षक

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पीलीभीत। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों का अधिकांश समय मोबाइल पर एप में सूचनाएं दर्ज करने में ही बीत रहा है। इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। शिक्षकों को 12 तरह के विभागीय एप में ब्योरा अपलोड करना पड़ता है। इस दौरान नेटवर्क की समस्या भी उनके आड़े आती है।
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शिक्षकों का स्कूल के समय मोबाइल व टेबलेट ऑनलाइन रहता है। बच्चों का नामांकन, रिपोर्ट कार्ड, आधार लिंक, बच्चों व अभिभावकों का ब्योरा, बैंक डिटेल ऑनलाइन करना, दिव्यांग बच्चों की उपस्थिति से लेकर निपुण भारत समेत अन्य की फीडिंग करनी पड़ती है।
सूचना समय से न भेजने पर वेतन रोकने समेत कई तरह की कार्रवाई का भी शिक्षकों को सामना करना पड़ता है। शिक्षकों का कहना है कि यू डायस पर हर बच्चे की 52 बिंदुओं पर सूचना भरनी होती है। इसके अलावा पढ़ाने के साथ ही समय-समय पर स्कूल की गतिविधियों के बावत जानकारी मुहैया कराना चुनौती से कम नहीं होता।
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इन एप पर दर्ज करनी पड़ती हैं जानकारी
शिक्षकों को प्रेरणा डीबीटी, दीक्षा, डीबीटी, निपुण, रेड एलोंग, समर्थ, पीएफएमएस, मिशन प्रेरणा, शारदा समेत 12 एप पर डिटेल अपलोड करनी पड़ती है। छह एप पर रोजाना कुछ न कुछ सूचना भेजनी पड़ती है। इनमें रीड एलोंग, निपुण, प्रेरणा, डीबीटी, समर्थ, प्रेरणा यूपी डॉट इन आदि एर शामिल हैं। वहीं अन्य एप का इस्तेमाल जुलाई से सितंबर, अप्रैल और मार्च में करना पड़ता है।




पुराने शिक्षकों को लेना पड़ता दूसरों का सहारा


स्कूल और विद्यार्थियों की सूचनाओं को ऑनलाइन मोबाइल एप पर भरने में युवा जागरूक शिक्षकों को परेशानी नहीं होती, वहीं पुराने शिक्षकों के सामने इसे पूरा करना बड़ी चुनौती बना रहता है। जानकारी के अभाव में वह एप चला नहीं पाते। ऐसे में उनको दूसरे शिक्षक या फिर अन्य किसी का सहारा लेना पड़ता है।

शिक्षक संघ पदाधिकारियों ने कहा
स्कूल से संबंधित सूचनाओं को दर्ज करने के लिए एप का उपयोग कराया जा रहा है। ऑनलाइन सूचनाएं भरने में समय खराब होता है। यह अनावश्यक काम है। इसको लेकर पूर्व में ज्ञापन दिया गया था। कोई ध्यान नहीं दिया गया। शिक्षकों से सिर्फ शिक्षण कार्य ही कराया जाए। जो विद्यार्थियों के हित में होगा।
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- लाल करन लाल, अध्यक्ष जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ




ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्य में समय अधिक लगता है। ऐसे में शिक्षण कार्य बाधित होता है। काम को कम कर दिया जाए तो शिक्षण कार्य भी प्रभावित नहीं होगा।
- अनीता तिवारी, जिला उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ महिला ईकाई
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