ग्रामीणों ने इस बाबत कई बार वन विभाग के अधिकारियों और आबकारी विभाग से शिकायत की थी। इस पर पिछले साल वन विभाग और आबकारी विभाग ने जंगल में संयुक्त रूप से कच्ची के कारोबार का भंडाफोड़ करने के लिए अभियान भी चलाया था। इससे पहले कि टीमें धंधेबाजों तक पहुंचती, वन विभाग के निचले स्तर के कर्मचारियों ने उन्हें सूचित कर दिया। इसके चलते इस अभियान में कुछ हाथ नहीं लगा।
जंगल में शिकार और कटान भी
वन विभाग के अधिकारियों को इस बात के भी इनपुट मिले हैं कि कच्ची शराब का धंधा करने वाले मौका पाकर मांस के लिए जंगली सुअर और हिरनों का शिकार भी कर रहे हैं। इसके अलावा शराब बनाने के लिए कीमती पेड़ों का कटान भी चोरी छिपे कर रहे हैं। दुधवा टाइगर रिजर्व में नेपाल से सटे जंगल इस तरह की अवांक्षित गतिविधियों का केंद्र बन गया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर ललित वर्मा ने बताया कि जंगल के अंदर नदी नालों के किनारे अवैध रूप से कच्ची शराब बनने के इनपुट मिले हैं। 28 जून से पूरे जंगल में अवैध रूप से बनने वाली कच्ची शराब के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्य में वनकर्मियों की किसी तरह संलिप्तता पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जिला आबकारी अधिकारी राजवीर सिंह ने बताया कि जंगलों में कच्ची शराब की जानकारी मिली है। सभी इंस्पेक्टरों से फीडबैक लिया जा रहा है, जो भी जानकारी मिल रही है, उसके आधार पर कार्ययोजना तैयार की जा रही है। जल्द ही पुलिस और आबकारी विभाग के साथ मिलकर कच्ची शराब के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा।