लखीमपुर खीरी। पहाड़ों पर हुई बारिश से शारदा नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बिजुआ क्षेत्र के रामनगर में शनिवार को बना पैंटून पुल बह गया। यही हालात पचपेड़ी घाट का भी रहा, जहां पानी बढ़ने के बाद पैंटून पुल पर आवागमन बंद हो गया है। समय से करीब 15 दिन पहले ऐसा होने से लोगों के सामने आवागमन का संकट पैदा हो गया है।
सुतिया नाले में भी पानी बढ़ने से पैदल और वाहनों की आवाजाही बंद रही। जरूरतमंदों ने नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लिया। समय से पहले नदी का जलस्तर बढ़ने से लोगों को आवागमन में मुसीबतें उठानी पड़ रही हैं। वहीं, बाढ़ का डर भी सताने लगा है। पचपेड़ी घाट पर पैंटून पुल के पास भी काफी पानी चल रहा है। लखीमपुर से वाया फूलबेहड़ निघासन का सीधा और शॉर्टकट रास्ता होने से ज्यादातर लोग पचपेड़ी घाट के पैंटून पुल को पार कर निघासन आते जाते हैं। प्रशासन ने इस बार शारदा नदी में तीन जगहों पर पैंटून पुल बनवाया था। यह 15 अक्टूबर से 15 जून तक चलते हैं।
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वर्जन
उत्तराखंड के पहाड़ों पर बारिश होने व बर्फ पिघलने से अचानक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है। समय से पहले बाढ़ आने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया है। अब सरकार द्वारा पुल हटाने का आदेश भी जारी हो गया है।
रामचंद्र वर्मा, जेई पीडब्ल्यूडी
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10 हजार की आबादी प्रभावित, अब दोगुना फेर लगाना होगा
शारदा का जलस्तर बढ़ने से पचपेड़ी घाट के नैंटून पुल से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। लखीमपुर से पचपेड़ी पुल होते हुए निघासन की दूरी मात्र 33 किलो मीटर है, लेकिन यह पुल बंद होने से अब 64 किलो मीटर का सफर तय करना होगा। पहले अधिकांश लोग लखीमपुर से फूलबेहड़ पचपेड़ी घाट पुल होते हुए निघासन, सिंगाही, बेलराया जाते थे, लेकिन अब शारदानगर, ढखेरवा चौराहा होते हुए जाना होगा। यह पुलिस बंद होने से करीब 10 हजार से अधिक लोगों का आना-जाना प्रभावित होगा। खासकर रकेहटी, बसरोला, करमूपुरवा, अमीरखान पुरवा, अदलाबाद आदि गांवों के लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हो गई।
रामनगर पुल बंद होने से 70 किलो मीटर का फेर लगाएंगे लोग
लखीमुपर खीरी। बिजुआ के रामनगर का पैंटून पुल क्षतिग्रस्त और आवागन बंद होने से क्षेत्र में एक बड़ी समस्या पैदा हो गई। बिजुआ से रामनगर पुल होते हुए निघासन की दूरी अभी तक मात्र 25 किलो मीटर थी, लेकिन अब यह दूरी 70 किलो मीटर से भी ज्यादा हो गई। करीब तीन गुना सफर बढ़ गया। रोजाना इस मार्ग से करीब 200 से 300 लोगों का गुजरना होता था। यह पुल बंद होने से मुर्गहाबल्ली, रामपुर, मझगई, दौलतपुर, बम्हनपुर आदि गांवों के लोगों के आगे एक बड़ी चुनौती हो गई। जिसमें रानगर गांव के कुछ किसानों की खेती नदी पार है। पुल होने से वह 10 मिनट में अपने खेत पहुंच जाते थे, लेकिन अब 70 किलो मीटर लंबी दूरी तय कर खेत पर जा सकेंगे। संवाद