मझगईं (लखीमपुर खीरी)। चौखड़ा फार्म के खेत में हाथियों के गुस्से के शिकार हुए मजदूर रामबहादुर के साथ अनहोनी की खबर पाकर लोग रात भर उन्हें तलाशते रहे, मगर शव मंगलवार तड़के चार बजे मिला। रामबहादुर को पकड़कर और ठोकर मारकर दूर तक ले जाने के साथ ही हाथियों ने कुचला भी।
मझगईं निवासी लालता व सुशील के साथ मिलकर रामबहादुर ने भी हाथियों को गन्ने के खेत से भगाने के लिए पटाखे दागे थे। माना जा रहा है कि इससे हाथी गुस्सा गए और उन्होंने पटाखे दाग रहे तीनों लोगों को दौड़ा दिया। लालता और सुशील ने तो मौके से किसी तरह भागकर जान बचा ली और गांव पहुंचकर रामबहादुर के घिरने की जानकारी दी। साथ ही अपने खेत मालिकों को बताया। इस पर इकट्ठे हुए लोग खेत पर पहुंचे। तब तक हाथी करीब आधा किमी दूर जंगल में जा चुके थे। लोगों ने रामबहादुर को काफी तलाश किया, मगर कुछ पता नहीं चला। सुबह चार बजे शव मिला। घटना का पता चलने पर रेंजर अंकित सिंह दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए और परिजनों को ढाढ़स बंधाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन के साथ ही ग्रामीण काफी गुस्से में थे। लोगों ने तार फेंसिंग लगाकर हाथियों को रोकने, मृतक रामबहादुर के एक पुत्र को सरकारी नौकरी देने व पांच लाख का मुआवजा दिए जाने की मांग कर शव उठने नहीं दिया। दोपहर बाद दुधवा के डीडी जगदीश आर व एसडीओ मनोज तिवारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया।दोपहर एक बजे अधिकारियों ने मृतक परिवार को पांच लाख का मुआवजा दिए जाने व एक सदस्य को नौकरी देने के आश्वासन दिया, जिस पर परिजन माने और शव पोस्टमॉर्टम के लिए ले जाने दिया। रेंजर अंकित सिंह ने बताया कि तत्काल 20 हजार रुपये की नकद सहायता राशि रामबहादुर की पत्नी को दी गई है। बाकी कार्यवाही पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी।
बेटियों के साथ बिलखती पत्नी को देख नम हुईं आंखें
रामबहादुर की पत्नी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बेटियों के साथ दहाड़े मारकर पति के शव के पास बिलखती पत्नी को देखकर वहां मौजूद हर ग्रामीण की आंखें नम हो गईं।
बेरहमी से हाथियों ने रामबहादुर को था पटका
हाथियों द्वारा रामबहादुर को काफी बेरहमी से पटका था। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब सौ मीटर दूर गन्ने के खेत के अंदर उसे हाथी घसीट ले गए थे और पटक-पटककर मारने की कहानी टूटा हुए गन्ने बयां कर रहा था। रामबहादुर के दोनों पैर टूट गए थे और शरीर पर काफी चोटों के निशान होने के साथ ही चेहरा काफी वीभत्स होने के साथ ही एक आंख बाहर निकल आई थी।
40 साल से नौकरी करने का कार्य कर रहा था रामबहादुर
रामबहादुर काफी गरीब होने के कारण करीब 40 साल से खेत की रखवाली करने का काम कर रहे। इस समय उन्हें छह हजार रुपये की पगार हर महीने में मिल रही थी। उनके पास मात्र दो बीघा जमीन थी और चार बेटियों व दो पुत्रों के जीवनयापन की जिम्मेदारी थी। वह चार बेटियों के साथ एक पुत्र की शादी कर चुके थे।
मझगईं में हाथियों के हमले में मृतक रामबहादुर की फाइल फोटो।
मझगईं में हाथियों के हमले में मृतक रामबहादुर की फाइल फोटो।
मझगईं में हाथियों के हमले में मृतक रामबहादुर की फाइल फोटो।