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राजा युवराज सिंह ने जिले में जगाई थी शिक्षा की अलख, तराई का नालंदा कहा जाता था युवराजदत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय

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युवराज दत्त महा विद्यालय के संस्थापक राजा युवराज दत्त सिंह - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। जिले की ओयल और कैमहारा स्टेट के राजा युवराजदत्त सिंह एक ऐसी शख्सियत थे जो शिक्षा के विकास के लिए जाने जाते हैं। वह सिर्फ जिले के ही नहीं, बल्कि एक पूरे बड़े भूभाग क्षेत्र की शान थे। उन्होंने जिले में शैक्षिक विकास को जो नए आयाम दिए हैं, उनका क्षेत्रवासी बहुत गौरव से धन्यवाद और अभिमान करते हैं। युवराज दत्त द्वारा स्थापित शहर का युवराजदत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय किसी समय तराई इलाके का सबसे बड़ा शैक्षिक स्थान था। जिसे तराई का नालंदा कहा जाता था। इसकी आलीशान इमारत ही नहीं शैक्षिक गुणवत्ता की भी मिसाल दी जाती थी।
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युवराजदत्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय तराई क्षेत्र के लिए एक वरदान है। युवराजदत्त महाविद्यालय की स्थापना राजा युवराजदत्त ने वर्ष 1949 में की थी। उनकी दानशीलता से न केवल महाविद्यालय स्थापित हुआ बल्कि पोषित और पल्लवित भी हुआ। महाविद्यालय में कला, विज्ञान, वाणिज्य और शिक्षा संकाय के विभिन्न विषयों के परास्नातक तक की शिक्षा का प्रबंध है। महान शिक्षाविद् संगीत शास्त्री पद्मभूषण डॉ. जयदेव सिंह इस महाविद्यालय के पहले प्राचार्य बने। जिन्होंने महाविद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और प्रतिष्ठा को चार चांद लगाने का काम किया।
महाविद्यालय की स्थापना के बाद नए भवन के निर्माण का काम शुरू हुआ। मौजूदा भवन का शिलान्यास 12 मार्च 1954 उत्तर प्रदेश के तत्कालीन शिक्षामंत्री हरगोविंद सिंह ने किया था। महाविद्यालय के संस्थापक राजा युवराजदत्त सिंह ने उत्तर प्रदेश में जमींदारी उन्मूलन के दो वर्ष पहले अपने राज्य के 27000 रुपये से कुछ अधिक वार्षिक आय के भाग का दान महाविद्यालय को किया था। यह आय आज भी महाविद्यालय को मिल रही है।
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शुरुआती दौर में युवराजदत्त महाविद्यालय आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध था, इसके बाद यह कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध हुआ। इसी साल इस महाविद्यालय को लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध किया गया है। महाविद्यालय में 25 से अधिक अध्यापन कक्ष हैं। इसके अलावा प्रत्येक विभाग के लिए विभागीय कक्ष और एक विशाल हाल है। यहां का पुस्तकालय भी काफी समृद्ध है। संस्थापक प्राचार्य डॉ. जयदेव सिंह ने भी अपनी बहुमूल्य पुस्तकें इस पुस्तकालय को दान की थीं। कभी आसपास जिलों के अलावा बरेली और आगरा तक के विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने आते थे। आज भी पड़ोसी राष्ट्र नेपाल के विद्यार्थी यहां अध्ययन के लिए आते हैं।
युवराजदत्त सिंह ने कई महाविद्यालयों के संचालन में दिया योगदान
पूर्व ओयल स्टेट के मौजूदा उत्तराधिकारी और युवराजदत्त महाविद्यालय के अध्यक्ष एवं प्रबंधक बीएनडी सिंह बताते हैं कि राजा युवराजदत्त ने देश के अनेक महाविद्यालयों को आर्थिक सहायता दी है। लेकिन इस महाविद्यालय लिए उनका सबसे बड़ा दान है। जिन अन्य महाविद्यालयों को उन्होंने संचालित करने में अपना योगदान दिया उनमें बलवंत राजपूत कॉलेज आगरा, उदय प्रताप कॉलेज वाराणसी और काल्विन तालुकेदार कॉलेज लखनऊ प्रमुख हैं। राजा युवराजदत्त सिंह ने जीवन पर्यंत इस महाविद्यालय की व्यक्तिगत रूप से देखरेख की।
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